भरुआसुमेरपुर। लोक संगीत, सुगम संगीत, शास्त्रीय संगीत जैसी मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ बिदोखर के रामजानकी मंदिर में 11 दिन से चल रहे झूला महोत्सव का समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन कलाकारों ने दादरा, सावन गीत, झूला गीत, बांसुरी वादन प्रस्तुत कर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
रामजानकी गांवटी मंदिर में व्यवस्थापक हरेराम दास और पहलवान अमर सिंह के निर्देशन में आयोजित परंपरागत कार्यक्रम में ख्याल गायन, कबीरी भजन, देवी गीत, सावन गीत, कीर्तन, गजल, शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत, लोक संगीत के कार्यक्रम हुए। समापन पर सुमेरपुर के गायक पं. रामलखन ने झूला गीत और मीरा के भजन सुनाकर सभी को मंत्र मुग्ध किया। लखनऊ से आए नवोदित कलाकार शिवम सिंह ने बांसुरी वादन प्रस्तुत किया।
डॉ. मान सिंह ने भक्ति गीत, प्रेम नारायण अग्निहोत्री ने शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया। इनके अलावा राकेश सिंह, कीरत सिंह, बच्चू लाल शर्मा, सत्तीदीन निषाद, जगदीश, राजेश कुमार, शंकर कुटार, प्रेम कुमार, राजा भैया कुशवाहा, सीताराम आदि ने सुमधुर कीर्तन भजन प्रस्तुत किए। झूला महोत्सव में जहां एक ओर संगीत के कार्यक्रम चलते रहे।
वहीं श्रीकृष्ण के हिंडोले में महिलाओं ने प्रतिदिन गीत गाकर उन्हें झूला झुलाया। कार्यक्रम में रामकरण अवस्थी, मुन्ना मिश्रा, लल्लू मिश्रा, जुगल किशोर पाठक, शिवनाथ सविता, देव सिंह, आशु सिंह आदि रहे। राम जानकी मंदिर में वृंदावन की तर्ज पर सावन मास में नाग पंचमी से लेकर रक्षाबंधन तक झूला महोत्सव मनाने की परंपरा विगत सात दशक से चली आ रही है।