नेशनल कालेज मार्ग स्थित नलकूप नंबर 8 का जर्जर भवन बुधवार को ढह गया। गनीमत रही कि हादसे के दौरान आपरेटर बाल-बाल बच गया।
कसबा
समेत रागौल, फत्तेपुर व सिचौली के 70 हजार से अधिक आबादी के लिए 11 में से
10 नलकूप संचालित हैं। इनमें से राठ मार्ग में लगा नलकूप का भवन जर्जर
होने के कारण इसे जल निगम को हैंडओवर नहीं किया गया। विभाग ने अपना आपरेटर
भी यहां से हटा लिया।
मजबूरी में जल संस्थान इसे चलवा रहा है।
कानपुर सागर मार्ग स्थित बीएसएनएल टावर के पास स्थापित नलकूप का भी यही हाल
है। सबसे खराब हालत नेशनल इंटर कालेज मार्ग स्थित नलकूप की थी। इसे
संचालित करने के लिए जल निगम ने कंप्रेशर चलवाया, जिससे इसका भवन चटक गया।
इस
पर जल संस्थान ने इसे लेने से इंकार कर दिया। इसकी मरम्मत के लिए पत्राचार
किया गया। बुधवार सुबह नलकूप भवन भरभराकर गिर गया। इसी से जुडे़ छोटे कक्ष
में नलकूप आपरेटर वसीम था। भवन गिरते देख वह जान बचाकर भागा। इसकी सूचना
स्थानीय कर्मचारियों ने अवर अभियंता सहित उच्चाधिकारियों को दी है।
जल
निगम ने इंगोहटा रोड के निकट ठप पड़े नलकूप को रिबोर कराने के लिए पैसा तो
ले लिया लेकिन एक साल बाद भी इसे रिबोर नहीं कराया गया। इसके कारण बढ़ती
गर्मी में पेयजल संकट गहरा रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में लोग पानी आने का
इंतजार करते रहते हैं। लेकिन जल निगम अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा।
इस
संदर्भ में जल संस्थान के अवर अभियंता एसएन त्रिवेदी ने बताया कि इस समय
वह 10 नलकूप चलवा रहे हैं जबकि 11 नलकूप चलने चाहिए। एक नलकूप को मांग के
बावजूद जल निगम नहीं रिबोर करा रहा है। वहीं तीन ऐसे नलकूप हैं जिन्हें अभी
विभाग को हैंडओवर ही नहीं किया गया।
लेकिन पानी की समस्या को
देखते हुए वह इन्हें भी चलवा रहे है। इसके लिए कई पत्र लिखे गए। लेकिन किसी
ने कोई ध्यान नहीं दिया। उनका प्रयास है कि वह मानक के अनुरूप पानी दें,
लेकिन दो नलकूपों में 7-8 घंटे ही बिजली मिल पाती है। जिससे रागौल,
फत्तेपुर व सिचौली गांव में प्रभाव पड़ रहा है।