सरीला क्षेत्र के चंडौत गांव में बेतवा नदी की मौरंग
खदानों में ट्रकों की आवाजाही से आएदिन हो रहे हादसों व उसके बाद होने वाले
हंगामे से परेशान प्रशासन को आखिरकार ग्रामीणों की मांग के आगे झुकना
पड़ा। घटनास्थल पर पहुंचे जिले के आला अफसरों ने गांव से होकर जाने वाले
ट्रकों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली
है।
जरिया थानाक्षेत्र के चंडौत गांव के बीच से बेतवा नदी की मौरंग
खदान रिरुआ, बसरिया व देवराही आने जाने वाले ट्रक निकलते है। इसी रास्ते
में गांव के तीन प्राथमिक विद्यालय पड़ते है। जिनके भवन भी चटक गए है।
गांव
के नाली व खड़ंजा तहस-नहस हो गए हैं। गांव में पैदल चलना दूभर हो गया है।
सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही से आएदिन हादसे होते है। ग्रामीण बताते है कि
ओवरलोड ट्रकों के टायर फटने से कई बार लोग घायल हो चुके हैं।
ग्रामीण
लगातार ट्रकों की आवाजाही बंद कराने को लेकर अफसरों के सामने गुहार लगाते
रहे हैं। पिछले माह 15 वर्षीय नरेंद्र के घायल होने के बाद ग्रामीणों ने
खदान के रास्ते को बदलने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया था।
बुधवार को
रोहित के कुचलकर मौत होने के बाद रास्ता बदलने को लेकर देर रात तक बवाल
हुआ था। तब घटनास्थल पर पहुंचे एडीएम कुंजबिहारी अग्रवाल व अपर पुलिस
अधीक्षक ने मौरंग खदान का रास्ता बदलवाने का आश्वासन देकर ट्रकों की
आवाजाही बंद करा दी।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि देशराज व नरेंद्र, धनीराम आदि
ने बताया कि दूसरे दिन एक भी ट्रक गांव से होकर नहीं निकला। जिससे काफी
राहत रही।
प्रभारी एसडीएम राठ व सरीला राजेश कुमार ने बताया कि अपर
जिलाधिकरी ने मौरंग खदान की ओर जाने वाले ट्रकों को गांव से होकर गुजरने पर
पाबंदी लगा दी है। मौरंग ठेकेदारों को गांव से बाहर रास्ता बनाने के
निर्देश दिए गए हैं।