गायत्री शक्तिपीठ में चल रहे महायज्ञ में मंगलवार को दीपयज्ञ हुआ। इसके साथ ही पुंसवन संस्कार, नामकरण, विधारंभ, मुुंडन और यज्ञोपवीत आदि संस्कार भी कराए गए। इनका महत्व भी बताया गया।
शांतिकुंज टीम के वरिष्ठ सदस्य बालरूप शर्मा ने बरगद, पीपल और गिलोय औषधि के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि इससे शिशु सबल, निरोग व पुष्ट बनता है। उन्हाेंने कहा कि मुंडन से पूर्व जन्मों के कुसंस्कारों का शोधन होता है। नाम का मनोवैज्ञानिक प्रभाव बच्चे पर पड़ता है।
मौके पर अमेद, अर्चित, अर्पित, हरिओम, अखिलेश, सिद्धी का नामकरण और विधारंभ संस्कार कराया गया। दो दर्जन से अधिक लोगों ने दीक्षा ली। सांयकालीन सत्र में दीपों के जलने से पूरा शक्तिपीठ परिसर रोशनी से जगमगा उठा। यज्ञाचार्य ने गृहस्थ धर्म को श्रेष्ठ बताया।
जिला संयोजक चंद्रशेखर मिश्र और उमेश शुक्ला ने बताया कि बुधवार सुबह पूर्णाहुति यज्ञ के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। आयोजन में पुष्पेंद्र कृष्ण, रमाकांत गुप्ता, कामिनी निगम, रामपूती सविता, रामकुमारी, पदमा सैनी, पुष्पा सिंह, सुमन शर्मा, शिवप्रसाद धुरिया, बिटटो भदौरिया, गीता सचान आदि मौजूद रहे।