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अवैध खनन में लिप्त कारोबारियों के नाम सामने आने लगे

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हमीरपुर। सत्ता की हनक और पुलिस व प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन के रूप मलाई खाने वाले अब सीबीआई की कार्रवाई से परेशान हैं। इस कारोबार में लिप्त अधिकारी, कर्मचारियों व मौरंग व्यवसायियों की नाम अब सामने आने लगे हैं।
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जनहित याचिकाकर्ता शहर निवासी विजय द्विवेदी एडवोकेट ने बताया खनन के इस धंधे में करीब दस हजार करोड़ रुपयों का वारा न्यारा होने का अनुमान है। इसका लाभ लंबी पहुंच वाले सत्ताधारियों ने जमकर उठाया है। बसपा व सपा शासन काल में मौरंग सिंडीकेट का खेल शुरू हुआ है। जो 10 सालो में दस गुना तक बढ़ा।

जिले में सिंडीकेट का संचालन करने में कई बड़े नाम सीधे तौर पर नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से आए हैं। सपा के सहारनपुर से एमएलसी रहे इकबाल का नाम भी चर्चा में रहा है। वहीं बसपा नेता रजा खान, सीरज ध्वज सिंह व प्रकाश द्विवेदी, विजय गुप्ता, शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा, सपा एमएलसी रमेश मिश्रा व सपा के पूर्व विधायक दीपनारायन यादव के नाम सिंडीकेट की लाइन में अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा में आ चुके हैं।
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फिलहाल सिंडीकेट की शुरुआत 1100 रुपये प्रति ट्रक से शुरू हुई। जो धीरे-धीरे 11 हजार रुपये तक पहुंच गई। सिंडीकेट के नाम पर होने वाली वसूली का 70 फीसदी धन प्रदेश स्तरीय नेताओं को भेजा जाता था। जबकि 30 फीसदी अवैध वसूली सिंडीकेट वसूलने वाले अपने पास रखते थे। विजय द्विवेदी ने कहा कि सीबीआई के पास ऐसे नामों की फेहरिस्त है।

भाजपाइयों की साजिश है कार्रवाई
हमीरपुर। सपा एमएलसी रमेश मिश्रा ने सीबीआई के छापे को लेकर कहा कि प्रदेश में सपा व बसपा का गठबंधन होने पर भाजपा नेता बौखला गए हैं। इसी राजनैतिक षड़यंत्र के तहत सीबीआई के जरिये छापेमारी कर बदनाम किया जा रहा है। कहा उन लोगों ने किसी भी प्रकार का अवैध मौरंग खनन नहीं किया है।
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सिंडीकेट में शराब कारोबारी रहे पोंटी चड्ढा का भी नाम अप्रत्यक्ष रूप से सामने आया
याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी ने दी जानकारी।
अमर उजाला ब्यूरो
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