हमीरपुर। केंद्रीय अंतर्स्थलीय मत्यस्की अनुसंधान संस्थान प्रयागराज की टीम ने शहर से निकली यमुना नदी का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विलुप्त हो रही अच्छी प्रजाति की मछलियों पर चिंता जाहिर की। नदियों, झीलों व जलाशयों पर काम कर रही टीम के अधिकारी उत्तराखंड से लेकर प्रयागराज तक जैव विविधता पर शोध कर रहे हैं। नदी से मिट्टी, पानी व मछली के नमूने एकत्र कर साथ ले गए।
टीम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. अबसार आलम ने बताया उनकी टीम दस साइडों में काम कर रही है। जिसमें सात यूपी में, एक हरियाणा, एक दिल्ली व एक आंध्र प्रदेश में हैं। कहा टीम विलुप्त हो रही मछली की प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है। बताया जैव विविधता पर नदियों, झीलों व जलाशयों का स्थलीय निरीक्षण कराया जा रहा है। बताया उत्तराखंड से लेकर प्रयागराज तक यमुना नदी का निरीक्षण कर रहे हैं।
बताया मछलियां आज से दस वर्ष पूर्व पाई जाती रही हैं वह अब विलुप्त हो गईं हैं। कहा वर्तमान में देसी प्रजाति की चाइनर, जलेबी व स्थायी मांगुर प्रजातियां अधिक बढ़ गईं हैं। अच्छी प्रजाति की मछली विलुप्त हो रही है। कहा नदी में 80 फीसदी चाइनर व कतला प्रजाति की मछलियां हावी हैं। जिसके चलते मिट्टी, पानी व मछली के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में शोध किया जाएगा। दल में वैज्ञानिक जितेंद्र कुमार, मुख्य तकनीकी अधिकारी साकेत कुमार श्रीवास्तव व सहायक अनिल कुमार मौजूद रहे।
मछली ठेकेदारों के यहां किया निरीक्षण
नदी में बांधों, गंदे नालों व कारखानों से आने वाले प्रदूषित पानी के कारण मछलियों की अच्छी प्रजाति खत्म हो गई है। बताया पानी व मिट्टी की जांच से सारी चीजें निकलेंगी कि पानी में कितना नमक है। कौन से रसायन अधिक है। कहा मछली ठेकेदारों के यहां निरीक्षण कर जानकारी करने पर पता चला कि बीते कुछ वर्षों में देसी मछली की प्रजाति बढ़ी है। जिसमें सबसे अधिक चाइनर मछली अधिक पाई जा रही हैं। जो अन्य प्रजाति की मछलियों को नहीं रहने देती है। वहीं जलेबी प्रजाति भी अधिक हावी है।