खेड़ाशिलाजीत गांव में रमेश लोधी के दरवाजे के सामने ध्वस्त पड़ा हैंडपंप।
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हमीरपुर। मार्च के आखिरी सप्ताह में ही गर्मी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट बढ़ता जा रहा है। 359 हैंडपंप खराब पड़े हैं। इनका रिबोर होना है। 50 हैंडपंपों की मरम्मत होनी है। 3700 कुओं में 708 ही प्रयोग लायक बचे हैं। बाकी सूख गए हैं। शिकायतों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जखेला निवासी रामफल ने बताया कि दरवाजे पर लगा हैंडपंप पिछले दो वर्षों से जलस्तर नीचे जाने से ठप है। गर्मी ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। ऐसे में पेयजल को लेकर दिक्कत आ रही है। देवगांव निवासी गया प्रसाद प्रजापति ने बताया कि दरवाजे में लगा हैंडपंप पिछले दो साल से ठप है। इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। पीने के पानी लेने के लिए दो सौ मीटर दूर जाना पड़ता है। गोहांड क्षेत्र के खेड़ाशिलाजीत गांव निवासी रमेश लोधी के दरवाजे के सामने लगा हैंडपंप रिबोर के अभाव में ढाई वर्षों से बंद है। इससे लोगों को पानी के लिए दूसरों के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। प्रधान प्रतिनिधि राम सिंह ने बताया कि बजट मिलते ही रिबोर कराया जाएगा। पत्योरा गांव निवासी अनंता सिंह ने बताया कि गांव में एक दर्जन से अधिक प्राचीन कुएं हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में आधे से अधिक सूख चुके हैं। इन्हीं से लोगों को पेयजल की आपूर्ति होती थी।
जिले में 20 हजार 620 हैंडपंप हैं। पिछले वर्ष 710 हैंडपंपों का रिबोर कराया गया था। अभी 359 हैंडपंपों का रिबोर और 50 हैंडपंपों की मरम्मत करानी है। 3748 कुओं में 3058 निष्प्रयोज्य हैं। 708 प्रयोग में है। सर्वे के लिए टीमें लगा दी गई हैं।
-राजेंद्र प्रकाश, डीपीआरओ