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Hamirpur News: दिव्यांग बच्चों को घर बैठे मिलेगी शिक्षा

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हमीरपुर। दिव्यांग बच्चों को अब शिक्षा के लिए स्कूल जाने की जरूरत नहीं होगी। बेसिक शिक्षा विभाग होम बेस्ड एजुकेशन कार्यक्रम के तहत गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों को घर पर ही शिक्षा उपलब्ध कराएगा। इसके लिए विभाग सर्वे कार्य शुरू कराएगा। सर्वे में 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले बच्चों को चिह्नित कर विशेष शिक्षकों से घर पर पढ़ाया जाएगा। साथ ही उन्हें शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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जिले में करीब 1,100 दिव्यांग बच्चे हैं। इनमें गंभीर रूप से दिव्यांग कुल 34 बच्चों को घर पर शिक्षित करने के लिए विशेष 17 शिक्षकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक दो बच्चों पर एक विशेष शिक्षक की जिम्मेदारी होती है। बच्चों को पढ़ाई के लिए कॉपी, किताबें और अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम के संचालन के लिए शिक्षण सामग्री और स्टेशनरी की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। शासन इसके लिए समिति का गठन भी कराएगी। समिति में डीएम को अध्यक्ष, बेसिक शिक्षा अधिकारी को सचिव, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को सदस्य, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा को सदस्य बनाया जाता है।
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प्राइमरी में दिव्यांग बालिकाओं के लिए 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से 10 माह के लिए कुल 2,000 रुपये बजट का प्रावधान है। इसी प्रकार कक्षा एक से आठ तक के गंभीर दिव्यांग बच्चों के लिए प्रति माह 600 रुपये बजट का प्रावधान है। दस माह के लिए कुल 6,000 रुपये शासन की ओर से दिए जाते हैं।
हिंदी-अंग्रेजी अल्फाबेट सहित पशु-पक्षियों के मिलेंगे चार्ट
गंभीर रूप से बहु-दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के लिए वुडन और प्लास्टिक मॉडल, हिंदी-अंग्रेजी अल्फाबेट, नंबर व आकृतियों के पजल, शरीर के अंग, फल-सब्जियों और यातायात के साधनों के चार्ट, पेग बोर्ड, म्यूजिकल इक्विपमेंट, किचन व डॉक्टर सेट, पिक्टोरियल चार्ट, पशु-पक्षियों के चार्ट, काउंटिंग फ्रेम, स्टैकिंग टॉयज, रैटल और लाइट प्रोड्यूसिंग खिलौनों सहित अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग का उद्देश्य ऐसे बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा घर पर ही उपलब्ध कराना है।
60 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता पर मिलेगा लाभ

शासन स्तर से कार्यक्रम के संचालन के लिए दिशा निर्देश जारी नहीं हुए हैं। आदेश मिलते ही गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए सर्वे कराया जाएगा। जिन बच्चों में 60 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता होगी और जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ सकते उन्हें विशेष शिक्षकों के माध्यम से घर पर ही शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।-मुकेश खरवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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