फोटो 25 एचएएमपी 21- प्रतियोगिता में घोड़े को डांस कराते उस्ताद और देखते दर्शक। संवाद
गहरौली। गांव में आयोजित दिवाली महोत्सव में बुंदेली लोककला की अद्भुत छटा देखने को मिली। भगवान कृष्ण की भक्ति में सराबोर ग्वाले बने मौनियों ने दिवाली नृत्य में अपनी कला कौशल का परिचय दिया। छोटे डंडों से करतब दिखाए और फिर लाठी चलाकर युद्ध कौशल का परिचय दिया। लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
महोत्सव के शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रधान महेंद्र कुमार राजपूत ने ने किया। उन्होंने कहा कि बुंदेली नृत्य हमारे बुंदेलखंड की पहचान है। इसमें वीरता, सेवा भक्ति और अनुशासन देखने को मिलता है। यह परंपरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। इस प्रतियोगिता से युवाओं में शारीरिक परिपक्वता और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। कार्यक्रम में तगारी ,गौरा, खन्ना सहित आधा दर्जन दिवारी नृत्य टीमों ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। रविवार को फाइनल मैच कराया जाएगा। बड़ोखर की महिला टीम ने फाइनल में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है।
कार्यक्रम का संचालन भूपेंद्र राजपूत और अजय राजपूत ने किया। इस मौके पर डॉ महिपाल यादव ,रामकुमार राजपूत, अश्वनी पांडे, सैंडी द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
परफ्यूम लगावे चुनरी में .. गीत पर झूमा घोड़ा
गहरौली। दो दिवसीय दिवाली महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को हो गया। पहले दिन घोड़ा डांस प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। इसे देखने के लिए दूर दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परफ्यूम लगावे चुनरी में गीत पर पूरन के घोड़ा ने सबसे अच्छा डांस किया। कमेटी ने प्रथम विजेता की घोषणा कर उस्ताद के हाथों में पुरस्कार सौंपा। दूसरी तरफ फकीर का घोड़ा दूसरे स्थान पर रहा। मसगांव के बृजलाल का घोड़ा तीसरे स्थान पर रहा। (संवाद)
फोटो 25 एचएएमपी 21- प्रतियोगिता में घोड़े को डांस कराते उस्ताद और देखते दर्शक। संवाद