हमीरपुर। मोराकांदर से कुंडौर मार्ग पर बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल हादसे के 10 दिन बाद भी जिलास्तरीय जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। 28 मई की रात आई आंधी के दौरान पुल का पांच नंबर पिलर और उससे जुड़े सेगमेंट गिरने से चार श्रमिक और दो सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई थी। मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग अब जांच रिपोर्ट का इंतजार करने के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हादसे के बाद जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने मौके का मुआयना कर तीन सदस्यीय जिला स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति में प्रमुख अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे सुरेश कुमार को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन ने हादसे के बाद मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई लेकिन जांच रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि जब जांच हो चुकी है तो प्रशासन हकीकत बताने में क्यों पीछे हट रहा।
सीएम से मिलूंगा, न्याय न मिला तो आत्मदाह करूंगा
स्वासा खुर्द गांव निवासी पुष्पेंद्र सिंह चौहान की मौत पुल हादसे में हुई थी। उनके भाई रविंद्र सिंह का कहना है कि पुल हादसे की असली वजह छिपाने का प्रयास किया जा रहा।
हादसा आंधी के कारण नहीं बल्कि घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के चलते हुआ। उन्होंने कहा त्रयोदशी संस्कार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलूंगा। मामले में न्याय चाहिए और दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए। न्याय नहीं मिला तो आत्मदाह करूंगा।
पैसे से नहीं लौट सकती जिंदगी, चाहिए न्याय
बांदा जिले के चिल्ला निवासी पुष्पेंद्र के भाई लोकेंद्र की पुल हादसे में मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि निर्माण करा रही कंपनी के मालिक ने 10 लाख व शासन ने चार लाख की मदद दी है। पैसे से जिंदगी वापस नहीं आ सकती। यह हादसा घोर लापरवाही की वजह से हुआ है। इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मेरा परिवार न्याय चाहता है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट उजागर करे। जांच के बाद किसके आदेश का इंतजार हो रहा यह समझ नहीं आ रहा।
जांच करने वाले वही तो कैसे मिलेगा न्याय
बांदा जिला के चिल्ला निवासी संदीप ने बताया कि 28 मई की रात में उसके भाई कुलदीप की मौत हो गई। पुल हादसे ने मेरा भाई छीन लिया। न्याय की उम्मीद लगाई थी, लेकिन जब पता चला कि वही लोग जांच कर रहे है जिनके निर्देशों पर यह काम हो रहा है तो उम्मीद टूटने लगी है। जांच में काम कराने वाली कंपनी को बचाने का प्रयास हो रहा है। जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट दे देनी चाहिए थी, नहीं दे रहे इसका मतलब कुछ गड़बड़ है। हम मजदूर है कर भी क्या सकते हैं। जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए तभी मेरे भाई की आत्मा को शांति मिलेगी।