फोटो 27 एचएएमपी 22- जानकारी देतीं प्रवेश सिंह। संवाद
हमीरपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से महिलाओं के उत्थान के लिए जिले में काम कर रही बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी को संचालित हुए पांच साल बीत चुके हैं। इस कंपनी ने जुड़कर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन घर की गाड़ी चला रही हैं। हर माह ये महिलाएं 10-12 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
खेती के साथ पशुपालन से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक व सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग (एनआरएलएम) के जरिए बुंदेलखंड में डेयरी उद्योग लगाने के लिए फंड जारी किया था। इसमें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी को जिले के साथ जनपद जालौन, झांसी, बांदा व चित्रकूट में डेयरी उद्योग चलाने के लिए नामित किया गया है। इस कार्य में सिर्फ महिलाओं को ही सदस्य बनाया जा रहा है। पैसा कंपनी महिला सदस्यों के बैंक खाते में ही भेजती है।
जो भी महिला सदस्य बनती है, उसी का दूध एमपीपी (कलेक्शन सेंटर) में लिया जाता है। कंपनी 50 रुपये सदस्यता शुल्क व सौ-सौ के पांच शेयर प्रति सदस्य से जमा कराती है। इसमें सदस्य को साल में बोनस भी दिया जाता है। वहीं, चिकित्सकीय सेवाएं, पशु आहार, हरा चारा आदि सेवाएं भी कंपनी की ओर से मुहैया कराई जाती हैं। वहीं, गांव-गांव खुले कलेक्शन सेंटरों (एमपीपी) में समूह की महिलाओं को तैनात किया गया है। इन्हें प्रति लीटर हिसाब से कमीशन कंपनी द्वारा दिया जाता है।
विकासखंड गाेहांड के धनौरी गांव निवासी प्रवेश सिंह भी इनमें से एक हैं। समूह से जुड़ने के बाद ये बलिनी के एमपीपी सेंटर का संचालन कर रही हैं। कहती हैं कि उसकी डेयरी में गांव की 100 से अधिक महिला सदस्य हैं। इनसे रोजाना करीब 300 लीटर दूध का कलेक्शन हो जाता है। हर माह 10-12 हजार रुपये का भुगतान कंपनी द्वारा उसके खाते में किया जाता है। इससे उसे आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है। साथ ही परिवार का भी अच्छे से गुजारा हो जाता है। साथ ही गांव की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की सलाह देती हैं। पशुपालन से जुड़कर शसक्त बनने का पाठ पढ़ाती रहती हैं। बेटे को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं।