हमीरपुर। नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से दस्तावेज लेकर हजारों फर्जी कंपनियां खड़ी कर दी गईं। इन फर्मों के जरिए फर्जी जीएसटी का रजिस्ट्रेशन किया गया। बाद में इन फर्मों के जरिए बिना वास्तविक व्यापार के इनपुट टैक्स क्रेडिट पास कर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में जांच पड़ताल के बाद पांच माह पहले जीएसटी टीम के अधिकारियों ने कोतवाली में विजय पुत्र सुरेश सविता निवासी रिंगना कारीमाटी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
जांच कर रही जीएसटी विभाग ने कोतवाली क्षेत्र के कारीमाटी में संचालित वीवाई ट्रेडर्स की जांच की तो पाया कि मौके पर कोई कंपनी संचालित ही नहीं है। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से बेरोजगार युवकों को अमेठी के एयरपोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज हासिल किए। बाद में उन्हीं दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर तैयार कर ऑनलाइन कंपनियां रजिस्टर की जाती थी। कोतवाली क्षेत्र के कारीमाटी में दर्ज फर्जी कंपनी वी वाई ट्रेडर्स की जांच में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच की तो पाया कि मौके पर कोई कंपनी संचालित ही नहीं है। मामले की जांच में जुटी सर्विलांस टीम को फर्जी फर्म के रजिस्ट्रेशन की लीड मिली। कॉल डिटेल व डिजिटल डेटा के आधार पर एसओजी, कोतवाली पुलिस ने गिरोह के सदस्यों पर दबाव बनाया।
माना जा रहा कि जांच में और मामले आएंगे सामने
शुक्रवार को टीम ने अंतर्राज्यीय गिरोह के एक सदस्य अविनाश दुबे को गिरफ्तार कर लिया। जीएसटी विभाग गिरोह के सदस्यों के द्वारा फर्जी तरीके से बनाई गई कंपनियों की जांच में जुटी है। आरोपी व उसके पास से मिले डेटा रिकार्ड के बाद विभाग के कर्मचारी स्थलीय जांच कर रही है। माना जा रहा है कि जांच के दौरान फर्जी तरीके से संचालित कंपनियों के खुलासें होगें। और अनुमान है कि जीएसटी चोरी का आंकड़ा बढ़ सकता है।