मौदहा विकासखंड क्षेत्र में स्थापित 90 सरकारी नलकूपों में सिर्फ 64 बंद हैं। इसमें 32 यांत्रिक तो 32 ही ट्रांसफार्मरों की खराबी से बंद पड़े हैं। नलकूपों के बंद होने से 50 हजार बीघा जमीन पर पलेवा नहीं हो पा रहा है। पूरे नौ माह फुर्सत में रहने वाला नलकूप विभाग अभी तक जागा नहीं है। यहीं हालत रही तो दैवी आपदा से पीड़ित किसान सड़काें पर उतरकर अपनी आवाज उठाने को मजबूर होंगे।
सरकारी नलकूप विभाग पूरे नौ माह मौज करता है। इस दौरान नलकूपों के टूटे पाइपों आदि की मरम्मत के नाम पर लाखाें रुपये का हिसाब किताब बनाता है। लेकिन मौके पर आज भी इनके पाइपों, गूलों व कुलाबाें की स्थिति जस की तस है। इतना ही नहीं यह विभाग नलकूपों के ठप होने का दोष बिजली विभाग पर ठोंकता है और ट्रांसफार्मराें की खराबी बताकर पल्ला झाड़ लेता है।
अभी नलकूप विभाग 32 नलकूप ठप होना बता रहे है। लेकिन यह विभाग यांत्रिक दोष से बंद नलकूपों के ठप होने की रिपोर्ट दबाए है। लंबी पड़ताल के बाद यांत्रिक खराबी से 32 सरकारी नलकूप ठप चल रहे हैं। जिनमें अकेले अरतरा गांव के नलकूप नंबर 124 एमजी, 62, 65, 113 व पढ़ोरी गांव का 81, तिंदुही का नौ, मकरांव का 97, पाटनपुर का 112, लेवा का 49, सिसोलर का 96, परछछ 122, टोलामाफ का 52, इमिलिया का 13, मिहुंना का 79, बम्हरौली 132, सायर का 100 एमजी हैं।
वहीं नलकूप विभाग ने अकेले 32 सरकारी नलकूपों में ट्रांसफार्मर की खराबी होेने से बंद बताया है। बिजली विभाग को नए ट्रांसफार्मर लगाने के लिए सूची भी प्रस्तुत की थी। जिस पर पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि उनके ज्यादातर ट्रांसफार्मरों का तेल निकाल लिया है और इन सभी की सूचना पुलिस भी दर्ज करा दी है। नए ट्रांसफार्मर आने में कठिनाई हो रही है। कुल मिलाकर एक नलकूप करीब एक हजार बीघा जमीन को सिंचित करता है और यदि मोटा आंकड़ा लगाया जाए तो 90 में 64 नलकूप ठप पड़े होने से 50 हजार बीघे से अधिक जमीन पलेवा के अभाव में पड़ी है।