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अध्यापकों ने प्रिंसिपल पर गुंडा तत्वों से हमला करवाने का जड़ा आरोप

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अमर उजाला ब्यूरो
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हमीरपुर। रावमापा जाहू में बुधवार को चल रहे प्रिंसिपल-स्टाफ विवाद में नया मोड आ गया। बच्चों के अभिभावकों की स्कूल स्टाफ को बदलने की मांग के बाद वीरवार को अध्यापकों ने भी शिकायत करने वाले अभिभावकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अध्यापकों ने शिकायत करने वाले अध्यापकों को गुंडा तत्व बताते हुए कार्रवाई की मांग की। अध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त हमीरपुर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अध्यापकों में राज कुमारी, शीतल, मीना कुमारी और सुधा कुमारी का कहना है कि बुधवार को स्कूल परिसर में प्रधानाचार्य ने गुंडा तत्वों को बुलाकर नारेबाजी करवाई। गुंडा तत्वों ने स्कूल परिसर में तोड़फोड़ कर अध्यापकों पर हमला करने की कोशिश की और अध्यापकों को मजबूरन कमरे में बंद होकर जान बचानी पड़ी। अध्यापकों का आरोप है कि घटनाक्रम की सूचना उन्होंने जब पुलिस चौकी में की तो प्रधानाचार्य ने गुंडा तत्वों को पुलिस के आने से पहले ही स्कूल परिसर से भगा दिया। अध्यापकों का आरोप है कि प्रधानाचार्य ने स्कूल का माहौल तनावपूर्ण कर दिया। इससे स्कूल में पढ़ाई का माहौल भी खराब हो रहा है। प्रधानाचार्य की हरकतों से उनका स्कूल में प्रवेश करना खतरे से खाली नहीं है। महिला अध्यापक स्नेहा ठाकुर का आरोप है कि वह गर्भवती है और उसे प्रताड़ित करने के लिए प्रार्थना सभा में खड़ा रखा गया। इसकी शिकायत महिला अध्यापकों ने प्रदेश महिला आयोग अध्यक्ष जैनब चंदेल को भेजी है। उपायुक्त हमीरपुर मदन चौहान ने प्रतिनिधिमंडल को मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
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स्कूल प्रकरण के लिए प्रधानाचार्य जिम्मेवार : संघ
हमीरपुर। रावमापा जाहू में प्रधानाचार्य और अध्यापकों में हुए विवाद के लिए प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ ने प्रधानाचार्य को जिम्मेवार ठहराया। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि सारे प्रकरण में प्रधानाचार्य की भूमिका संदेहास्पद है। संघ के अध्यक्ष केबल ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप ढटवाल, अजय नंदा, श्यवीर जंबाल, अरविंद, अनिल आदि का कहना है कि जब बाहरी लोग स्कूल में नारेबाजी कर रहे थे तो उन्होंने अपने आला अधिकारियों या पुलिस को इसकी सूचना क्यों नहीं दी। अगर विवाद प्रधानाचार्य और शिक्षकों के बीच था तो बाहरी लोग प्रधानाचार्य के विरुद्ध की गई शिकायत को वापस लेने का दबाव क्यों बना रहे थे। स्पष्ट है कि प्रधानाचार्य बाहरी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने विभाग और सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही प्रधानाचार्य के तबादले की मांग की है।
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