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12 विभागों ने 673.29 लाख की धनराशि शासन को की सरेंडर

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हमीरपुर। वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर 12 विभागों को विकास के लिए आए 673.29 लाख रुपये की धनराशि लौटानी पड़ी। यह धनराशि समय पर खर्च नहीं की जा सकी।
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जिला सांख्यिकी अधिकारी वृंदावन अहिरवार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कुल परिव्यय के सापेक्ष पशुपालन विभाग को 26.17, दुग्ध विकास को 29.16, वन विभाग 664.75, ग्राम्य विकास को 415.20, मनरेगा के लिए 7294.40, सड़क व पुल को 78.11, प्राथमिक शिक्षा के लिए 1290.60, माध्यमिक शिक्षा को 355.33, ग्रामीण स्वच्छता को 794.52, ग्रामीण आवास को 3212, अनुसूचित जाति कल्याण को 310.70, समाज कल्याण को 1397.66 व सामान्य जाति को 140.26 लाख की धनराशि शासन से अवमुक्त हुई थी। जिसके सापेक्ष पशुपालन विभाग ने 18.95, दुग्ध विभाग 25.08, वन विभाग ने 612.19, ग्राम्य विकास ने 375.20, मनरेगा में 1823.60, सड़क एवं पुल 78.11, प्राथमिक शिक्षा 1153.30, माध्यमिक शिक्षा 231.70, ग्रामीण स्वच्छता 476.30, ग्रामीण आवास पर 3212, अनुसूचित जाति कल्याण ने 310.70, समाज कल्याण विभाग ने 1389.96 व सामान्य जाति पर 140.26 लाख की धनराशि खर्च की। शेष 673.29 लाख की धनराशि शासन को सरेंडर कर दी है।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता एमएल वर्मा ने बताया कि (प्रांतीय खंड) का दो करोड़ 72 लाख व (निर्माण खंड दो) का चार करोड़ 82 लाख तीसरे स्टेप में स्वीकृत न हो पाने से कार्रदाई संस्थाओं व ठेकेदारों का भुगतान होना शेष रह गया है।
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वरिष्ठ कोषाधिकारी दिनेश कुमार सचान ने बताया कि आखिरी दिन स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, जिला पंचायत विभाग व माध्यमिक शिक्षा विभाग के बिल जमा कराए गए। वहीं आरबीआई से मिली गाइड लाइन के मुताबिक रात नौ बजे के बाद कोई बिल नहीं जमा किए गए। जिसमें आयुष अस्पताल मौदहा का दस लाख का बिल रात दस बजे आया, जिसे वापस कर दिया गया। वहीं लोनिवि व मौदहा बांध का कुछ भुगतान नहीं हो सका है। रात पौने आठ बजे से 8:20 तक सर्वर फेल होने से काफी काम बाधित रहा।
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