पुनर्वास कॉलोनी में सुविधाओं का यह है हाल
शौचालय: कुल 13 ब्लॉकों में बसी पुनर्वास कॉलोनी में करीब 600 परिवार रह रहे हैं। अधिकांश के पास व्यक्तिगत शौचालय नहीं है। सामुदायिक शौचालय तीन बनना है। अभी एक का निर्माण पूरा हो पाया है, लेकिन वह चालू नहीं है। उस पर ताला लगा है।
पेयजल: हर ब्लॉक में 10-15 घरों के बीच एक हैंडपंप लगा है। ज्यादातर हैंडपंप बेकार पड़े हैं। किसी का हेड गायब तो कोई कम बोरिंग के चलते पानी छोड़ चुका है। चालू हैंडपंपों से भी मटमैला पानी आने की शिकायत है।
स्वास्थ्य: पुनर्वास कॉलोनी के लिए अलग से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना है, मगर यह अभी स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। लिहाजा इसमें कोई सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र में कॉलोनी के ठेकेदार ने अपना सामान रखकर ठिकाना बना रखा है।
बिजली: वैसे तो पुनर्वास कॉलोनी में विद्युतीकरण हुआ है। तार-पोल भी खींचे गए हैं, मगर विद्युतीकरण नहीं है। रहवासियों को इंतजार है कि विभाग उनकी बिजली का प्रबंध करेगा। कुछ ने व्यक्तिगत कनेक्शन भी लिया है तो ज्यादातर जुगाड़ के सहारे हैं।
सड़क-नाली: कॉलोनी बसाते समय कुछ ब्लॉकों में नाली बनी थी, जो पूरी नहीं है। इससे पानी निकासी प्रभावित है। कॉलोनी की मुख्य सड़क बनी है, मगर अंदर जाने वाली अधिकांश सड़कें कच्ची ही हैं।
बोले स्थानीय लोग
गांव के सभी लोग ब्लॉक बी में रहते हैं। यहां एक भी शौचालय नहीं है। बेटी-बहू खुले में शौच के लिए जाने को विवश हैं। कई बार अधिकारियों से कहा गया, लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं हैं। बिजली का कनेक्शन नहीं होने पर सोलर टॉर्च जलाकर रहना पड़ रहा है। हैंडपंपों की मरम्मत नहीं कराई जा रही। हैंडपंप का पानी 10 मिनट के बाद पिला हो जाता है।
- शमशुल हक, विस्थापित।
महिलाओं के लिए अलग से बोरी से घेराव कर शौचालय बनाए हैं। पुनर्वास के नाम पर प्लाट मिला था। इसी में कच्चा मकान बनाकर रहते हैं। बारिश के दिनों में घर के भीतर पानी चले जाने से दिक्कत होता है। नाली नहीं बनी है। इसके अभाव में पानी का निकास नहीं होने से परेशानी होती है।
- जमीरुद्दीन, विस्थापित।
गांव में थे तो हम किसान थे। यहां आकर मजदूर हो गए। बताया गया था कि पुनर्वास कॉलोनी में बड़े शहरों जैसी सुविधाएं हाेंगी, मगर सब छलावा निकला। सबसे बड़ी चुनौती तो बिजली, पानी, शौचालय की है। हॉस्पिटल तो बना है लेकिन उसमें ठेकेदार रहते हैं। शुरुआत के चार सप्ताह रविवार को डॉक्टर आए उसके बाद कुछ भी पता नही चला।
- खुर्शीद आलम, विस्थपित।
मुआवजा तो मिला लेकिन हम लोगों को नोट बंदी में ठग लिया गया। दो हजार के नोट रखने पर जेल होगी बताकर कुछ लोगों ने रुपये ले लिए। रहने को घर नहीं है। प्लास्टिक के छज्जा बनाकर टाटी के मकान में रहने को विवश हैं। खेती बाड़ी भी नही है। जंगलों में भी पकड़कर भगा देते हैं। जैसे तैसे बस जिंदा हैं। आवास, शौचालय, बिजली की जरूरत है।
- शिवशरन, विस्थापित।
बोले अधिकारी
पुनर्वास कॉलोनी में विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। विभाग एक बार सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा की सुविधा देगी, लेकिन उसके नियमित मेंटनेंस के लिए कॉलोनी को दुद्धी ब्लॉक से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए पंचायती राज विभाग को पत्र भेजा गया है। अमवार परियोजना से सभी परिवारों को हर घर नल योजना के तहत पानी की आपूर्ति की जाएगी।
- विनोद कुमार, एक्सईएन, कनहर सिंचाई परियोजना।