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पाकिस्तान से भी ऊंचा है गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर

Sat, 26 Oct 2019 01:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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खाद कारखाने का बनकर तैयार प्रिलिंग टावर
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विश्व के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफार्म के बाद अब गोरखपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गई है। दुनिया भर में जितने भी यूरिया खाद के कारखाने बने हैं उनमें हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) द्वारा गोरखपुर में बनाए जा रहे खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर सबसे ऊंचा है। इसके निर्माण से पहले 125 मीटर ऊंचाई के साथ पाकिस्तान के दहरकी शहर में एंग्रो फर्टिलाइजर्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर विश्व का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टॉवर था।

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गोरखपुर में जापानी कंपनी द्वारा तैयार इस टॉवर की ऊंचाई 149.5 मीटर है। इसका व्यास 28 से 29 मीटर है। धनतेरस के एक दिन पहले ही यह बनकर तैयार हुआ। शुक्रवार को एचयूआरएल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट वीके दीक्षित ने पत्रकारवार्ता के दौरान इस उपलब्धि को साझा करते हुए बताया कि गोरखपुर के यूरिया प्लांट के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई दुनिया भर में अब तक के फर्टिलाइजर प्लांट के प्रिलिंग टॉवरों में सबसे अधिक है।

उन्होंने बताया कि एचयूआरएल द्वारा यह कारखाना करीब 7085 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। गोरखपुर खाद कारखाना देश का सबसे बड़ा खाद कारखाना होगा। कारखाना नेचुरल गैस से संचालित होगा, इसके लिए गेल द्वारा वाराणसी से गोरखपुर खाद कारखाना तक गैस पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
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उन्होंने बताया कि गेल द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन से आने वाली नेचुरल गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाएगा। अमोनिया के इस लिक्विड को प्रिलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाएगा। इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम तैयार किया जा रहा है।

अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया छोटे-छोटे दानों के रुप में प्रिलिंग टॉवर के बेसमेंट में बने कई होल के रास्ते बाहर आएगा। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाया जाएगा। नीम कोटिंग होने के बाद उसे पैक किया जाएगा। बताया कि कारखाने में अमोनिया कूलिंग टॉवर के सभी नौ सेल भी बनकर तैयार हो गए हैं। कारखाने का यांत्रिक कार्य नवंबर 2020 में पूरा हो जाएगा जबकि उत्पादन का काम फरवरी 2021 में शुरू होगा।

कुतुबमीनार से दोगुना ऊंचा है प्रिलिंग टॉवर
गोरखपुर खाद कारखाने के प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई कुतुबमिनार से दोगुने से भी अधिक है। कुतुबमिनार की ऊंचाई 72.5 मीटर (237.86 फीट) है जबकि प्रिलिंग टॉवर की ऊंचाई 149.5 मीटर (490.48 फीट) है। एचयूआरएल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट वीके दीक्षित ने बताया कि दुनिया के भीतर दूसरे नंबर का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टॉवर एंग्रो फर्टिलाइजर्स लिमिटेड द्वारा पाकिस्तान के दहरकी में बनाए गए खाद कारखाने का है जिसकी ऊंचाई 125 मीटर है जबकि गोरखपुर खाद कारखाने की ऊंचाई इससे करीब 25 मीटर अधिक है। उन्होंने बताया कि यूरिया प्लांट में टॉवर की ऊंचाई हवा की औसत रफ्तार के बाद तय की जाती है। इसके लिए एचयूआरएल की टीम ने करीब महीने भर हवा की रफ्तार को लेकर सर्वे किया था।

टॉवर की ऊंचाई का फायदा
यूरिया के दानों को लेकर देश के भीतर जो मानक तय है, उसके मुताबिक यूरिया के दाने 0.3 एमएम से अधिक नहीं होने चाहिए। गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर ऊंचा होने की वजह से इसमें 0.2 एमएम के दाने बनेंगे। दानों का आकार छोटा होने से वे मिट्टी में तेजी से घुलेंगे और उसका असर भी जल्द पड़ेगा।

10 मेगावाट बिजली के लिए करार
एचयूआरएल के वाइस प्रेसिडेंट ने बताया कि कारखाने के लिए उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन से 10 मेगावाट बिजली को लेकर करार किया गया है। हालांकि हमें बिजली की आवश्यकता नहीं है। प्लांट को चलाने के लिए जितनी बिजली की आवश्यकता है, उससे अधिक उत्पादन खुद एचयूआरएल कर लेगा। 10-10 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए दो गैस टर्बाइन लगाए जाएंगे। वहीं 18 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए स्टीम टर्बाइन लगाया जाएगा।

क्या है प्रिलिंग टॉवर
गोरखपुर खाद कारखाना के 149.5 मीटर ऊंचे प्रिलिंग टॉवर में यूरिया निर्माण से संबंधित तरल पदार्थों को दूसरे यूनिट से पाइप लाइन के माध्यम से लाकर ऊंचाई से गिराया जाएगा। जिसके बाद वह धीरे-धीरे नीचे आते हुए टॉवर के अंदर के तापमान की वजह से छोटे-छोटे यूरिया के दानों में बदल जाएगा।

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