जिले की बेटियों में ही नहीं महिला शिक्षकों में भी अब इतना आत्मविश्वास बढ़ गया है कि वे किसी भी परिस्थितियों का सामना कर सकेंगी। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के अभियान ‘बेटी ही बचाएगी’ के तहत शुरू हुए ‘पावर एंजेल्स’ कार्यक्रम में छात्राओं के साथ महिला शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आर्य कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित आत्मरक्षा की ट्रेनिंग में छात्राओं ने अपनी हर शंका का हल खुद खोज निकाला। पूर्वांचल नि:युद्ध अकादमी के प्रशिक्षकों के सहयोग से यह शिविर 15 दिनों तक चला।
‘पावर एंजेल्स’ कार्यक्रम में शुक्रवार को आर्य कन्या इंटर कॉलेज में अकादमी के योगेंद्र प्रताप के नेतृत्व और महिला प्रशिक्षकों की देखरेख में छात्राओं ने आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लिया।
कॉलेज की प्रधानाचार्य रीता श्रीवास्तव समापन समारोह की मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने ‘अमर उजाला’ के इस प्रयास की सराहना की और बताया कि उनके कॉलेज की चार छात्राएं पावर एंजेल्स चुनी गई हैं। इनमें स्तुति खंडेवाल, भारती तिवारी, हिमांशी गुप्ता और ज्योति शाह शामिल हैं।
अमर उजाला की पहल सराहनीय है। लड़कियों के अंदर से डर दूर हो गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से लड़कियों ने बेबाक होकर अपनी समस्या महिला प्रशिक्षकों के सामने रखीं। आज के परिवेश में छात्राओं को इस तरह की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए।
रीता श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य, आर्य कन्या इंटर कॉलेज
अमर उजाला की इस पहल से लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही महिला शिक्षकों को भी बहुत खुश सीखने को मिला। इससे वे भी लड़कियों को प्रशिक्षित कर सकती हैं। इसके साथ ही लड़कियां अन्य पीड़ित महिलाओं की भी मदद कर सकती हैं।
रंजना गुप्ता, क्रीड़ाध्यक्ष, आर्य कन्या इंटर कॉलेज
प्रशिक्षण की शुरुआत में डर लगा
स्कूल में 15 दिन पहले जब प्रशिक्षण शुरू हुआ था तो बहुत डर लग रहा था कि कहीं चोट न लग जाए, लेकिन धीरे-धीरे पूरा डर निकल गया।
पूनम, इस्माइलपुर
प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ गया
इस ट्रेनिंग का सबसे ज्यादा फायदा यह हुआ है कि लड़कियों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया। 15 दिन में वह सब कुछ सीखने को मिला जिसकी लड़कियों को जीवन भर जरूरत पड़ेंगी।
ललिता कुशवाहा, निजामपुर
शिक्षकों ने भी बढ़ाया उत्साह
प्रशिक्षण शिविर के दौरान शिक्षकों के साथ होने से जबरदस्त उत्साहवर्धन हुआ। कैंप समाप्त होने के बाद भी प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने हर बिंदु को बारीकी से समझाया।
श्रद्धा त्रिपाठी, रायगंज
दूसरों की मदद करने की मिली प्रेरणा
प्रशिक्षण शिविर में सबसे महत्वपूर्ण यह सीखने को मिला कि दूसरों की हम लड़कियां कैसे मदद कर सकती हैं। मैं अपनी जैसी अन्य लड़कियों को भी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दूंगी।
प्रज्ञा, हुमायुपुर
प्रधानाचार्य ने दी सीख
स्कूल में आत्मरक्षा की ट्रेनिंग के दौरान शुरुआती समय में कैंप में जाना अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन प्रधानाचार्य रीता श्रीवास्तव ने समझाया। उन्होंने प्रशिक्षण का महत्व बताया तो सब कुछ समझ में आ गया।
मधु उपाध्याय, मिर्जापुर
लड़कियों को देती हूं ट्रेनिंग
आत्मरक्षा की ट्रेनिंग तीन साल से ले रहीं हूं। स्कूल में अन्य लड़कियों को भी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग समय-समय पर देती रहती हूं।
प्रिया विश्वकर्मा, छोटे काजीपुर