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टेराकोटा: गोरखपुर में बनेंगे दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर

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टेराकोटा: गोरखपुर में बनेंगे दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर
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गोरखपुर। दुनियाभर में खास पहचान रखने वाले गोरखपुर के टेराकोटा शिल्पियों को अब जिले में ही बेहतर सुविधाएं मुहैया हो सकेंगी। केंद्र और प्रदेश सरकारें टेराकोटा शिल्पियों के लिए यहां दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने जा रहीं हैं। इसके बाद एक ही छत के नीचे टेराकोटा के शिल्पियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। नुमाइश ग्राउंड में ‘उद्यम समागम सह एक जनपद, एक उत्पाद प्रदर्शनी’ के दौरान शिल्पियों को यह जानकारी मंगलवार को दी गई।
जिले में टेराकोटा समेत अन्य उद्योगाें को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कानपुर और जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की ओर से से आयोजित दो दिवसीय ‘उद्यम समागम सह एक जनपद, एक उत्पाद प्रदर्शनी’ की शुरुआत मंगलवार को बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला ने की। कहा कि टेराकोटा से गोरखपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। प्रदेश सरकार इस कला को बढ़ावा देने के लिए ओडीओपी योजना के अंतर्गत चयन कर इसके शिल्पियों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार भी उपलब्ध करा रही है। यह रोजगार का बहुत अच्छा साधन भी साबित हुआ। युवाओं को इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाना चाहिए। पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने भी उद्यमियों से सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि देश-विदेश में टेराकोटा की पहचान है, लेकिन गोरखपुर में ही इस उत्पाद को ठिकाना नहीं मिल पाता है। प्रदेश सरकार को इस उत्पाद के लिए एक ऐसा ठिकाना बनाना चाहिए कि जहां सारे टेराकोटा शिल्पी अपने उत्पाद बेच सकें। इस दौरान चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया, महासचिव प्रवीण मोदी, संयुक्त आयुक्त उद्योग आशुतोष त्रिपाठी, उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, सहायक उपायुक्त प्रभात यादव, सांख्यिकी अधिकारी रश्मि सिंह समेत काफी संख्या में उद्यमी आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर में टेराकोटा के बनेंगे दो कलस्टर
उपायुक्त उद्योग आरके शर्मा ने बताया कि टेराकोटा को बेहतर प्लेटफार्म दिलाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार स्तर पर गोरखपुर में टेराकोटा के लिए दो कलस्टर बनाए जाएंगे। न्यूनतम 20 उद्यमियों के लिए यह कलस्टर बनेगा। इसके तहत यहां कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा, जहां उद्यमियों के लिए मिट्टी की टेस्टिंग, उत्पादों के रंग-रोगन, पैकेजिंग आदि की जानकारी देने के साथ आधुनिक मशीनों से युक्त लैब बनाई जाएगी। प्रदेश सरकार की ओडीओपी योजना के तहत सर्वे हो चुका है। जल्द ही डीपीआर बनाई जाएगी। वहीं केंद्र सरकार की योजना के तहत भी एक कलस्टर तैयार किया जाएगा।
विदेश के उद्योग मेले में स्टॉल लगाने पर सवा दो लाख की सहायता
तकनीकी सत्र के दौरान एमएसएमई कानपुर के उप निदेशक अजय वाजपेयी ने बताया कि केंद्र सरकार एमएसएमई उद्यमियों को कई तरह की सहायता देती है। गोरखपुर में टेराकोटा शिल्प का उद्योग लगाने वालों को 1.50 करोड़ रुपये तक लोन का प्रावधान है। इस पर 20 लाख रुपये तक अनुदान भी मिल सकता है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से देश के किसी भी राज्य में उद्योग मेले में स्टॉल लगाने पर 45 हजार और विदेश में आयोजित उद्योग मेले में स्टॉल लगाने पर 2.25 लाख रुपये तक की सहायता मिलती है। हालांकि यह खर्च की रसीद जमा करने पर प्रतिपूर्ति के रूप में मिलता है।
पांच मिनट में खुद करें एमएसएमई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
एमएसएमई डीई के अनवेषक एसके गंगल ने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए किसी भी उद्यमी का एमएसएमई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। अभी काफी संख्या में उद्यमी इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते हैं, जबकि घर बैठे अपने स्मार्टफोन से भी मात्र पांच से सात मिनट में udhyogaadhaar.gov.in पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
उद्यमियों को दी जेम पोर्टल की जानकारी
केंद्र सरकार के गवर्नमेंट ई पोर्टल (जेम) के प्रवीण बाधवानी ने उद्यमियों को इसके बारे में जानकारी दी। बताया कि जेम पर रजिस्ट्रेशन होने पर केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अपने उत्पादों को बेच सकते हैं। इस दौरान कई उद्यमियों ने जेम पोर्टल पर आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। प्रवीण बाधवानी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान किया।
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आकर्षण का केंद्र बने विभिन्न स्टॉल
प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न विभागों के अलावा हस्तशिल्पियों के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। शिवप्रताप शुक्ल ने भी इन स्टॉलों का निरीक्षण किया। इनमें खादी ग्रामोद्योग, हैंडलूम, रेशम, कृषि, विभिन्न बैंकों के स्टॉलों पर लोग विभिन्न जानकारियों लेते नजर आए।
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