होटल शिवाय में एकता सेवा संस्थान द्वारा किन्नर दिवस पर नाटक का मंचन किया गया।
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तीसरे ट्रांसजेंडर डे पर अधिकारों की मांग को लेकर शहर के किन्नरों ने एकजुटता दिखाई और प्रदेश किन्नर बोर्ड बनाने का फैसला किया। शहर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में किन्नरों ने 15 अप्रैल 2014 को जारी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का फिर से स्वागत किया गया, जिसमें उन्हें ट्रांसजेंडर के रूप में मान्यता दी गई थी। साथ ही इस विषय पर दुख व्यक्त किया कि पिछले फैसले को दो वर्ष हो गए लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने किन्नरों के विकास के लिए कुछ नहीं किया।
एकता सेवा संस्थान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम मेें संस्थान के सचिव वीरेंद्र राज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दक्षिण के कई प्रदेशों की सरकारों ने किन्नरों के विकास के लिए कई निर्णय लिए, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उपेक्षा ही की। उन्होंने कहा कि किन्नर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।
जरूरत उनके प्रतिभा के इस्तेमाल की है। ऐसा करने पर ही वे समाज की मुख्य धारा में जुड़ सकेंगे। चेन्नई से आए गिरीश कुमार ने आयोजन का संचालन किया और किन्नर बोर्ड के गठन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मौजूद मेयर डॉ. सत्या पांडेय, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुसूदन त्रिपाठी, पूर्व जज शैलेंद्र त्रिपाठी ने किन्नरों की समस्या को ध्यान से सुना और उन्हें मदद का आश्वासन दिया। आयोजन की अध्यक्षता गुड़िया किन्नर ने की। इस अवसर पर शहर के सैकड़ों किन्नरों की मौजूदगी रही।