हत्या में सजायाफ्ता कैदी मुकेश हजातपुरिया को मेडिकल कॉलेज से बिना इलाज के लौटा दिया गया। महराजगंज जेल से उसे चिकनपॉक्स और पैर में गोली लगने से हुए घाव के उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। उसके पैर का ऑपरेशन होना था पर बजट के अभाव में उपकरणों का इंतजाम न हो सका। इसी बीच बुधवार को उसे डिस्चार्ज कर जेल भेज दिया गया।
बुलंदशहर में चर्चित गन्ना निरीक्षण की हत्या के बाद सुर्खियों में आए मुकेश को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगी थी। मेरठ में गोली निकालने के बाद उसे महराजगंज जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इधर बीच उसके पैर में घाव हो गया। एक दिन जेल में गिर जाने से उसके पैर में फ्रैक्चर भी हो गया। पहले तो उसका जेल के अस्पताल में इलाज शुरू किया और बाद में चिकन पॉक्स होने पर उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया।
आर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक यादव ने ऑपरेशन के लिए आवश्यक उपकरणों के इंतजाम के लिए एसआईसी को पत्र लिखा था, मगर बजट न होने से उपकरण नहीं आ सके। हालांकि कैदी बजट की व्यवस्था करने को तैयार हो गया था, मगर इसी बीच एसएसपी के कड़े पत्र के बाद आनन-फानन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
प्राइवेट वार्ड से मांगी थी रंगदारी
प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर छह में भर्ती रहे मुकेश ने अस्पताल से ही बुलंदशहर के दो चीनी मिल मालिकों से रंगदारी के रूप में मोटी रकम मांगी थी। बुलंदशहर के एसएसपी ने गोरखपुर के एसएसपी को इस संबंध में पत्र लिखा था। इस बारे में एसएसपी ने गुलरिहा थानेदार से ब्योरा मांगा था। समझा जाता है कि इसी दबाव में मंगलवार को ब्लॉक प्रमुख और बुधवार को मुकेश को डिस्चार्ज कर दिया गया।
इलाज को आने वाले कैदी का ब्योरा मांगा
एसएसपी की ओर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले हर कैदी का पूरा ब्योरा पुलिस को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उसकी निगरानी की जा सके। गुलरिहा थानेदार ने एसएसपी का यह पत्र एसआईसी और प्राचार्य दोनों को दिया है।