आए दिन बिजली-पानी की दिक्कत के चलते हंगामे की स्थिति गोरखपुर यूनिवर्सिटी की नियति बन चुकी है। बिजली की खराबी की वजह से होने वाली पानी को समस्या को लेकर हॉस्टल के छात्रों का सड़क पर उतरना यूनिवर्सिटी ही नहीं, जिला प्रशासन के लिए भी चुनौती बन जाता है। इस बवाल की वजह यूनिवर्सिटी में लगे पांच ट्रांसफार्मरों पर क्षमता से कहीं अधिक बोझ है। ऐसे में इन ट्रांसफार्मरों का जवाब दे जाना लाजिमी है।
यूनिवर्सिटी परिसर के पांच ट्रांसफार्मर में से चार 400 केवीए के हैं और एक 250 केवीए का है। कायदे में इन ट्रांसफार्मरों की क्षमता का 80 फीसदी उपयोग ही एक बार में किया जाना चाहिए, लेकिन स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। सभी ट्रांसफार्मरों पर या तो क्षमता के बराबर या क्षमता से 10 से 20 फीसदी अधिक लोड है। नतीजा यह निकलता है कि आए दिन ये ट्रांसफार्मर जवाब दे जाते हैं। पिछले दिनों तीन ट्रांसफार्मरों का एक साथ खराब हो जाना इसकी बानगी है, जिसके चलते लगातार दो दिन तक यूनिवर्सिटी परिसर में हंगामे का माहौल बना रहा। शैक्षणिक माहौल तो खराब हुआ ही, छात्रों को खाने-पीने से लेकर तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
वजह की तह में जाएं तो इस स्थिति के लिए खुद छात्र जिम्मेदार तो हैं ही, साथ ही यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों की भी बड़ी भूमिका है। छात्रों की ओर से हॉस्टल में अवैध रूप से जलाए जा रहे बेइंतहा हीटर जहां आए दिन मांग और आपूर्ति की गणित बिगाड़ देते हैं, वहीं विभागों और आवासों में पिछले दिनों बढ़ी एसी की तादाद भी इसके लिए जिम्मेदार है। खासकर एसी को लेकर हद दर्जे की बेइंतजामी है। सूत्रों के मुताबिक बिना आधिकारिक सूचना के दर्जनों एसी विभागों और आवासों में चल रहे हैं, जिसका कोई हिसाब यूनिवर्सिटी के पास नहीं है।
यह सही है कि यूनिवर्सिटी के लिए तय आपूर्ति यहां की जरूरत से काफी कम है। हीटर और एसी की बढ़ी तादाद से यह दिक्कत पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा बढ़ी है। इसके चलते आए दिन ट्रांसफार्मर जवाब देने लगते हैं। लोड बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी की ओर से प्रक्रिया चल रही है।
- श्रवण कुमार, अभियंता, गोरखपुर यूनिवर्सिटी