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रिकार्ड रूम से 37 गांवों के जिल्द बंदोबस्त गायब

Thu, 23 Jun 2016 01:20 AM IST
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
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रिकार्ड - फोटो : demo pic
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जिले के बांसगांव तहसील के 37 गांवों के जिल्द बंदोबस्त, रिकॉर्ड रूम से गायब हो गए हैं। महकमा अब इसे चकबंदी दफ्तर से लेकर इलाहाबाद राजस्व परिषद तक तलाश रहा है। इन दस्तावेजों को खोजते हुए इलाहाबाद रेवन्यू बोर्ड गई प्रशासन की टीम भी खाली हाथ लौट आई।
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बोर्ड का कहना है कि चकबंदी महकमे से उसे इन गांवों के रिकॉर्ड कभी मिले ही नहीं। वहीं चकबंदी महकमे को भी नहीं पता की इन गांवों के जिल्द बंदोबस्त कहा गए। एसओसी अनिल कुमार राय का कहना है कि सभी दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में ही होने चाहिए। मगर करीब 48 साल पुराने ऐसे कोई भी रिकार्ड महकमे में है ही नहीं।

दरअसल खजनी और बांसगांव में दूसरी चकबंदी शुरू होने जा रही है। ऐसे में इन गांवों के जिल्द बंदोबस्त गायब होने से जिम्मेदारों के हाथ पांव फूले गए हैं। विकल्प के तौर पर प्रशासन इसकी एक प्रति लेखपालों के पास होने का दावा तो कर रहा है, मगर प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक उनके पास भी ज्यादातर दस्तावेज नहीं है और अगर हैं भी तो उनमें छेड़छाड़ की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता। बता दें कि 1962 में बांसगांव तहसील में चकबंदी हुई थी। उसके बाद जिल्द बंदोबस्त की एक प्रति रिकॉर्ड रूम, एक प्रति रेवन्यू बोर्ड और एक प्रति लेखपालों को सौंपी गई थी।
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चूंकि इस चकबंदी को पांच दशक पूरे होने जा रहे हैं, लिहाजा उस समय के कई लेखपाल सेवानिवृत्त हो गए या फिर उनका देहावसान हो गया। इसके बाद जिन लेखपालों के हाथों में ये जिल्द बंदोबस्त आए, उन्हें कोई विशेष जरूरत नहीं पड़ने पर वह भी गायब होते गए। चूंकि जिल्द बंदोबस्त में 1962 के पहले और फिर चकबंदी के बाद इन गांवों की जमीनों की स्थिति मसलन उनका रकबा, उसकी कीमत आदि दर्ज है, इसलिए नई चकबंदी इन दस्तावेजों के बिना हो पाना मुश्किल है।
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