शिक्षकों की कमी से जूझ रहे गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भर्ती की सारी अड़चनें अब दूर हो गई हैं। आरक्षण को लेकर पिछले दिनों राज्य सरकार से गाइडलाइन मिलने के बाद सोमवार को यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद ने भी इसे हरी झंडी दे दी। कार्य परिषद की मुहर के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर संवर्ग के करीब 192 पदों के लिए विज्ञापन इसी सप्ताह जारी होने की संभावना है।
इससे पहले वर्ष 2014 में यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें 185 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया। लोगों ने आवेदन भी कर दिया। लेकिन आरक्षण को लेकर विधिक पेंच फंसने से नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटक गई। इस संबंध में 19 फरवरी 2016 को राज्य सरकार ने नई आरक्षण नियमावली जारी कर दी।
सोमवार को कार्य परिषद ने बैठक कर नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने कर निर्णय लिया। साथ ही इस बात पर भी फैसला हुआ कि वर्ष 2014 में आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को इसमें समाहित कर लिया जाएगा। कार्यपरिषद ने तय किया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। अगर पहले विज्ञापन और नए विज्ञापन के बीच किसी अभ्यर्थी ने कुछ नई उपलब्धि हासिल की है तो नए प्रमाण पत्र की उपलब्धता के लिए वह फिर से आवेदन कर सकते हैं।
अब इस आधार पर लागू होगा आरक्षण
19 फरवरी 2016 को जारी शासनादेश के मुताबिक अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए संवर्ग में न्यूनतम पांच पद तथा अन्य पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए न्यूनतम चार पद जरूरी हैं। इसके अलावा पूर्व के दो शासनादेशों में साफ किया गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए पृथक-पृथक विभाग को इकाई मानते हुए आरक्षण लागू होगा। वहीं प्रोफेसर पद के लिए प्रत्येक विषय को एक यूनिट माना जाएगा। जहां प्रोफेसर का 1 ही पद होगा, वहां आरक्षण लागू नहीं होगा।