कलेक्ट्रेट में बृहस्पतिवार को नगर निगम के टेंडर फार्म बेचने के दौरान माहौल बदला-बदला नजर आया। बुधवार को जहां माफिया टेंडर मैनेज करने में लगे रहे वहीं इस दिन डीएम कार्यालय के दोनों चैनल गेट बंद कर दिए गए। जिसे फार्म लेना था वह अकेले ही अंदर गया। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद बृहस्पतिवार को टेंडर फार्म बिक्री स्थल पर किसी को खड़े ही नहीं होने दिया गया। हालांकि दूसरे दिन दो ठेकेदार आमने-सामने आ गए, मगर पुलिस की सक्रियता से विवाद टल गया।
नगर निगम में नगरीय अवस्थापना विकास निधि समिति की बैठक में शहर के कई वार्डों में नाली, सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्यों के लिए कलेक्ट्रेट में बुधवार से टेंडर फॉर्म बेचने की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले दिन कुछ माफिया ठेकेदारों को फार्म खरीदने से रोक रहे थे। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद गुरुवार को डीएम कार्यालय के दोनों चैनल बंद कर दिए गए थे। जिसे फार्म लेना था, वह अकेले अंदर गया।
दोपहर साढ़े 12 बजे वार्ड नंबर तीन बिछिया में पीएसी गेट से शास्त्रीनगर तक नाली और सड़क निर्माण के लिए 31 लाख 48 हजार रुपये की लागत वाले टेंडर को मैनेज करने में कुछ ठेकेदार लगे थे, लेकिन इसी बीच ठेकेदारों का दूसरा ग्रुप पहुंच गया। उन्होंने फार्म भी खरीदा। मैनेज करने वालों को जब इसकी जानकारी हुई तो वे भी अपने साथियों के साथ पहुंच गए।
कुछ क्षण के लिए दोनों ग्रुप आमने-सामने आ गए, लेकिन पुलिस के पहुंच जाने पर किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। दोनों ग्रुप एक-दूसरे को देख लेने की धमकी देते हुए चले गए।