महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो स्थित गन्ना शोध संस्थान की जमीन पर एम्स बनाने के फैसले के बाद अब शोध संस्थान खुटहन में ट्रांसफर करने की तैयारी है। इस संबंध में शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने संबंधित बिंदुओं पर आधारित रिपोर्ट भेज दी है। पूर्व में खुटहन की जिस 235 एकड़ जमीन पर एम्स का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था वहीं पर संस्थान स्थापित करने की कवायद शुरू की जा रही है। इस जमीन तक पहुंचने के लिए फोरलेन बनाने का निर्णय किया गया था, जिसके लिए राज्य सरकार 180 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर चुकी है।
अब चूंकि वहां एम्स बनना नहीं है और शोध संस्थान के लिए फोरलेन की कोई जरूरत भी नहीं। लिहाजा इसमें से मामूली सी रकम में टू-लेन सड़क तैयार हो जाएगी। यहीं नहीं, संस्थान पहले 112 एकड़ में था, जबकि वहां इससे दो गुनी जमीन है। इसके अलावा उच्च तकनीक से युक्त प्रयोगशाला और दफ्तरों के साथ ही नई आवासीय इमारतें भी बनेंगी।
दरअसल करीब नौ दशक से स्थापित गन्ना शोध संस्थान को लेकर मुख्यमंत्री फिक्रमंद थे। यूपी में तेजी से घट रही गन्ना की पैदावार और किसानों की कम होती रुचि ने इस चिंता को और बढ़ा दिया था। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि संस्थान का वजूद किसी भी दशा में खत्म न हो बल्कि इसे और समृद्ध बनाया जाए। एम्स की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने जिस दिन गन्ना शोध संस्थान की जमीन देने की घोषणा की उसी दिन से शोध संस्थान की शिफ्टिंग को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। अब इसपर लगाम लग जाएगी।
नौ दशक पुराना है संस्थान का वजूद
गोरखपुर। महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो में करीब नौ दशक पहले 1932 में गन्ना शोध संस्थान की स्थापना हुई थी। यहां गन्ने की कई नई प्रजातियां विकसित हुईं। गन्ने के रोग और दवाओं पर भी शोध हुआ। कई दवाएं भी यहां ईजाद की गईं। यहां से गन्ना का बीज विकसित कर फैक्ट्रियों को दिया जाता है। हर साल 10 हजार किसानों तक यह बीज पहुंचता है। इस साल भी वहां 12 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया है।
जल्द एम्स के लिए ट्रांसफर हो जाएगी जमीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोरखपुर में एम्स के शिलान्यास के बाद अब गन्ना शोध संस्थान की जमीन ट्रांसफर करने की कवायद शुरू हो गई है। इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट की बैठक होने वाली है। वहां से प्रस्ताव पास कर जमीन राज्य सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नाम कर दी जाएगी।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो में स्थित गन्ना शोध संस्थान की जमीन की पैमाइश के साथ ही सर्किल रेट के हिसाब से उसकी कीमत भी आंकी है। आंकलन की यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इसके मुताबिक शोध संस्थान की 112.02 एकड़ जमीन की कीमत 768 करोड़ रुपये पाई गई है। इसके अलावा संस्थान में बनी इमारतों आदि की कीमत भी करीब चार करोड़ है। हालांकि एम्स के मानक के मुताबिक राज्य सरकार, केंद्र सरकार से जमीन के एवज में उसकी कीमत नहीं मांग सकती।
22 जुलाई को शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने तीन साल में एम्स का निर्माण पूरा होने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि गन्ना शोध संस्थान की जमीन ट्रांसफर होते ही स्वास्थ्य मंत्रालय एम्स के निदेशक की तैनात भी कर देगा, जिसकी देखरेख में निर्माण कार्य शुरू होंगे।