यूनिवर्सिटी का स्नातकोत्तर सेमेस्टर सिस्टम अब विद्यार्थियों पर भारी पड़ने लगा है। इसके चलते यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कॉलेजों के करीब तीन दर्जन से अधिक विद्यार्थियों का साल बर्बाद होने की स्थिति बन गई है। इससे उबरने के लिए विद्यार्थी लगभग हर दिन यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस नहीं मिल पा रहा है।
ये विद्यार्थी सेमेस्टर सिस्टम के जिस नियम में उलझे हैं, वह है पहले व तीसरे और दूसरे व चौथे सेमेस्टर की परीक्षा का एक साथ होना। इसके चलते विद्यार्थी दूसरे सेमेस्टर में पास होने के बावजूद पहले सेमेस्टर में फेल होने की वजह से तीसरे सेमेस्टर में प्रवेश नहीं ले पा रहे। यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक ऐसे विद्यार्थियों को तीसरे सेमेस्टर में प्रवेश का अवसर तब दिया जाएगा, जब यूनिवर्सिटी की अगली परीक्षा में वे पहले सेमेस्टर को पास कर लेंगे।
अब चूंकि पहले सेमेस्टर की परीक्षा तीसरे सेमेस्टर के साथ होगी, ऐसे में इन विद्यार्थियों को पहले सेमेस्टर की परीक्षा के इंतजार में छह महीने का इंतजार करना पड़ रहा है और परीक्षा देने के बाद तीसरे सेमेस्टर में प्रवेश के लिए छह महीने बैठे रहना पड़ रहा है। इसे लेकर विद्यार्थियों का स्नातकोत्तर का कोर्स दो साल की जगह तीन साल में पूरा हो रहा है।
विद्या परिषद की बैठक में नहीं हो सका निर्णय
ऐसा नहीं कि विद्यार्थियों की गुहार का असर यूनिवर्सिटी प्रशासन पर नहीं पड़ा। पिछले दिनों हुई विद्या परिषद की बैठक में इसे तर्क संगत बनाने के लिए गंभीर मंथन भी हुआ लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। निर्णय के नाम पर बस इतना ही हुआ कि सभी संकायों के डीन को विभागाध्यक्षों से बातकर सुधारात्मक प्रस्ताव देने के लिए कहा गया। फिलहाल भटक रहे विद्यार्थियों का क्या होगा, इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पास कोई जवाब नहीं है।
विद्यार्थियों की समस्या जायज है लेकिन यूनिवर्सिटी के नियमों से हटकर कोई कार्य नहीं किया जा सकता। परास्नातक के सेमेस्टर सिस्टम में सुधार की गुंजाइश तलाशने का कार्य संकायों के डीन को सौंपा गया है। रिपोर्ट मिलते ही नियमों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल विद्यार्थियों को तत्काल कोई राहत नहीं दी जा सकती।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति