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एम्स की जमीन को लेकर फिर बढ़ी हलचल 

Sun, 17 Jul 2016 01:19 AM IST
अरुण चन्द , अमर उजाला, गोरखपुर।
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केंद्रीय टीम ने गन्ना संस्‍थान की जमीन का निरीक्षण किया था। - फोटो : amar ujala/file photo
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गोरखपुर में एम्स के लिए पूर्व में प्रस्तावित खुटहन की जमीन के मामले में कोर्ट का आदेश राज्य सरकार के पक्ष में आने के बाद एम्स को लेकर फिर हलचल बढ़ गई है। राज्य सरकार ने खुटहन की जमीन का प्रस्ताव फिर दोहराया है। केंद्र को पत्र लिखकर सरकार ने कहा है कि अब एम्स के लिए केंद्र के पास गन्ना शोध संस्थान की जमीन के साथ ही खुटहन की जमीन का भी विकल्प है।
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सरकार ने कहा है कि अगर सुरक्षा मानकों या जमीन के मानक में कहीं कोई दिक्कत आती है तो खुटहन की जमीन पर एम्स बनाया जा सकता है। इस जमीन को लेकर जो कानूनी अड़चन थी वह पूरी तरह से दूर हो चुकी है। एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने इसकी पुष्टि भी की है।

राज्य सरकार ने खुटहन की जमीन की पैरवी करते हुए कहा है कि यह जमीन एम्स के सभी मानकों को पूरा करती है। 235 एकड़ का बड़ा रकबा होने के साथ बिजली, पानी की भी माकूल व्यवस्था है। केंद्र की मांग पर फोरलेन के लिए बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है। उधर जिले के सपा नेता भी खुटहन में ही एम्स के निर्माण को लेकर सक्रिय हो गए हैं। कई नेता मुख्यमंत्री से पैरवी में भी जुटे हैं।
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बता दें कि सबसे पहले एम्स के लिए केंद्र सरकार को खुटहन की जमीन का ही प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्रीय टीम ने जमीन का निरीक्षण भी किया। मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य शिक्षा के साथ हुई बैठक में पीएमओ ने वहां फोरलेन का निर्माण कराने के निर्देश के साथ ही अपनी सहमति भी जताई थी। इसके बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने फोर लेन के लिए फंड भी स्वीकृत कर दिया। मगर उक्त जमीन पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए हाई कोर्ट गए रमन दास के मामले में लंबे समय तक फैसला न आने पर केंद्र ने दूसरी जमीन की तलाश शुरू कर दी। इसके बाद गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ जमीन पर मुहर लगी और अब 22 जुलाई को प्रधानमंत्री के आगमन पर इसके शिलान्यास की भी तैयारी है।  खुटहन में ही बनाया जाए एम्स : डक्कू पूर्व में प्रस्तावित एम्स की जमीन के मामले में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आने के बाद अब सपाई खुटहन की जमीन पर ही एम्स बनाने की मांग करने लगे हैं। सपा नेता जफीर अमीन डक्कू का कहना है कि खुटहन की जमीन एम्स के मानक के मुताबिक है। खुद केंद्र सरकार भी यह स्वीकार कर चुकी है। सिर्फ कानूनी अड़चन की वजह से एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की जमीन का चयन किया गया जिसका न केवल रकबा मानक से बहुत कम है बल्कि वहां ऊंची इमारतों का निर्माण कराना देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ होगा।

कहा कि एयरफोर्स के आसपास ज्यादा ऊंची इमारतें नहीं बनाई जा सकती है। भाजपा सिर्फ 2017 के चुनाव में लाभ उठाने के लिए देश की सुरक्षा से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि अब जबकि जमीन को लेकर राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आ गया है तो लोगों के आरोपों की भी पोल खुल गई है। कौन एम्स के निर्माण में बाधा पैदा करना चाहता था, जनता जान चुकी है। कहा कि कोर्ट के इस आदेश ने यह साबित कर दिया है कि सदर सांसद आदित्यनाथ के ही इशारे पर नमनदास के परिवार ने झूठी रिट दाखिल किया था।  खुटहन की जमीन ज्यादा उपयुक्त: अमरेंद्र पिपराइच विधायक राजमति निषाद के प्रतिनिधि अमरेंद्र निषाद ने कहा कि खुटहन में जमीन का विवाद पूरी तरह से खत्म हो चुका है। यह जमीन गन्ना शोध संस्थान की जमीन से ज्यादा उपयुक्त है। एम्स के मानक पर भी खुटहन की ही जमीन फिट बैठती है। इस जमीन तक पहुंचने के लिए फोरलेन, बिजली, पानी के इंतजाम के लिए मुख्यमंत्री ने पहले ही रजामंदी दे दी है। ऐसे में क्षेत्र की जनता की मांग है कि एम्स, खुटहन में ही बने। 
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