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बिल्डर-कालोनाइजर्स की ओर से बेची जा रही जमीन-फ्लैट की होगी जांच

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बिल्डर-कालोनाइजर्स की ओर से बेची जा रही जमीन-फ्लैट की होगी जांच
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अरुण चन्द
गोरखपुर। शहर के सभी बड़े बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स की ओर से 2016 से लेकर अब तक बेची गई जमीन-फ्लैट की जांच होगी। एक बिल्डर के मामले में करीब चार करोड़ रुपये की की स्टांप की कमी पकड़े जाने पर दर्ज हुए केस के बाद कमिश्नर जयंत नार्लीकर ने यह निर्णय लिया है। उनके निर्देश पर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार, एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव और उप महानिरीक्षक (डीआईजी) निबंधन रामानंद सिंह को मामले की जांच सौंपी है। माना जा रहा है कि इन बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स द्वारा स्टांप ड्यूटी में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का गोलमाल किया गया है। हालांकि इसका सही खुलासा संबंधित अपार्टमेंट-कॉलोनियों के प्रोपराइटर्स पर केस दर्ज कर स्टांप कमी का निर्धारण करने के बाद ही पता चलेगा।
कमेटी ने सभी सब रजिस्ट्रार से संबंधित बैनामों की डीड तलब करने के साथ ही जीडीए से इन बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स की ओर से स्वीकृत कराए गए ले- आउट मांगा है। गड़बड़ी मिलने पर एआईजी स्टांप के कोर्ट में केस दर्ज होगा और फिर संबंधित पक्षों को नोटिस देकर उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट बुलाया जाएगा। सुनवाई के बाद स्टांप कमी का निर्धारण होगा और फिर उसे जमा करने के लिए 15 दिन से लेकर एक महीने तक का समय दिया जाएगा।
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आवासीय जमीन का बैनामा कृषि में करने पर हुए सतर्क
होटल व्यवसायी अतुल कुमार सिंह ने 26 अप्रैल 2019 को साक्ष्य समेत शिकायत की थी कि स्टांप ड्यूटी के तौर पर सरकार को बड़ी क्षति पहुंचाई गई है। डीआईजी स्टांप रामानंद सिंह ने जीडीए से ले-आउट और सब रजिस्ट्रार दफ्तर से मंगाए गए बैनामों की डीड की जांच की। पता चला कि जीडीए से कॉलोनी का ले-आउट आवासीय स्वीकृत कराया गया था जबकि बैनामा कृषि भूमि बताकर कर दिया गया। कई प्लॉट पर मकान भी बना लिए गए हैं। करीब चार करोड़ की स्टांप कमी आंकने के बाद डीआईजी ने मामले में केस दर्ज कराया। इसी बीच कमिश्नर को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अब सभी बड़े बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स के अपार्टमेंट-कॉलोनियों की जांच करने के लिए कमेटी गठित कर दी।
2015 में भी हुई थी जांच, दबा दी गई रिपोर्ट
गोरखपुर में बड़े बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स की ओर से जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टांप ड्यूटी कम जमा करने का मामला समाजवादी पार्टी के शासन में उठ चुका है। जांच भी हुई मगर रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगस्त 2015 में तत्कालीन आईजी स्टांप ने अंतर्जनपदीय कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई थी। इसमें तत्कालीन एआईजी देवरिया रामानंद सिंह (वर्तमान में डीआईजी स्टांप गोरखपुर), एआईजी स्टांप महराजगंज मनोज शुक्ला, एआईजी गोरखपुर रामशंकर सिंह और एआईजी कुशीनगर दुर्गा प्रसाद शामिल थे। जांच में कई बिल्डरों-कॉलोनाइजरों की कमियां भी पकड़ी गई थी। रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई थी मगर बाद में मामला ठंडा पड़ गया।
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इन कॉलोनियों/अपार्टमेंट के बैनामों की होगी जांच
ग्रीन सिटी
पॉम पैराडाइज
संत हुसेन नगर
दिव्य नगर
चाणक्यपुरी कॉलोनी
विनोद विहार
मिलेनियम सिटी
कोट-
स्टांप कमी का एक मामला पहले पकड़ा जा चुका है। अब कुछ और बड़े बिल्डर्स-कॉलोनाइजर्स की ओर से बेची जा रही जमीन-फ्लैट के बैनामों की जांच की जा रही है। कमिश्नर के निर्देश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। संबंधित सब रजिस्ट्रार और जीडीए से दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
- रामानंद सिंह, डीआईजी स्टांप
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