गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय में रविवार को आयोजित इंटरवेंशनल पल्मोनोलाजी एंड रेस्पाइरेटरी अपडेट-2016 के यूपी चैप्टर कार्यक्रम का आयोजन किया गया गया। सेमिनार का उद्घाटन गोरक्ष पीठाधीश्वर व सदर सांसद महंत आदित्यनाथ ने किया। उन्होंने स्मारिका का भी विमोचन किया।
इस दौरान लखनऊ केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि एमडीआर मरीज एक साल में 18 लोगों को टीबी का मरीज बनाता है। स्तनधारियों के फेफड़ों को प्रभावित करने वाली माइको बैक्टीरियम टीबी की तुलना में एमडीआर टीबी के संक्रमण का खतरा दोगुना होता है।
उन्होंने कहा कि माइक्रो बैक्टीरियम टीबी की दवाएं अब एमडीआर टीबी पर बेसअर हो गई हैं। इससे एमडीआर टीबी के मरीजाें का इलाज समय साध्य और खर्चीला हो गया है। एमडीआर टीबी के मरीजों की जल्द पहचान व इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 160 जीन थेरेपी मशीनें लगाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि टीबी संक्रामक बीमारी है। इसका मरीज दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है। एमडीआर टीबी के संक्रमण को देखते हुए ही एमडीआर टीबी की जांच में तेजी लाई जा रही है ताकि समय रहते इसे नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अब मरीजों की सामान्य टीबी के साथ ही एमडीआर टीबी की जांच भी की जा रही है।
कार्यक्रम में बीएचयू के पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. जेके समारिया, कानपुर के जीएसवीएम कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर चौधरी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, गोरक्षनाथ चिकित्सालय के निदेशक डॉ. केपीबी सिंह, आयोजन समिति के सचिव डॉ. राजीव श्रीवास्तव, सह सचिव डॉ. अजय श्रीवास्तव व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. एएन त्रिगुण मौजूद रहे।
आयोजक डॉ. शशांक ओझा ने बताया कि चिकित्सालय में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में 20 बेड का वार्ड है। अस्पताल में ब्रांकोस्कोपी की भी सुविधा उपलब्ध है। जल्द ही थोरेकोस्कोपी की सुविधा भी हो जाएगी। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन से मंजूरी मिल चुकी है।