मान्यता हासिल करने के लिए कॉलेजों की ओर से किए गए फर्जीवाड़े की कड़ी में सोमवार को एक और मामला जुड़ गया। गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने 25 ऐसे कॉलेजों को पकड़ा है जिन्होंने खून के रिश्ते को ही कॉलेज प्रबंधक कमेटी का सदस्य बना दिया।
सिर्फ इतना ही नहीं, ऐसा न किए जाने का यूनिवर्सिटी को शपथ पत्र भी दे दिया। रजिस्ट्रार ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा 30 अन्य कॉलेज जो संदेह के दायरे में है, उनकी गहन जांच भी शुरू कर दी है। दोषी कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन विचार कर रहा है।
इन दिनों करीब 70 डिग्री कॉलेजों ने स्थाई और अस्थाई मान्यता के लिए यूनिवर्सिटी में आवेदन किया है और प्रक्रिया पूरी करने के लिए यूनिवर्सिटी से पैनल निरीक्षण का आवेदन किया है। पैनल निरीक्षण मंडल के गठन के क्रम में जब इन कॉलेजों की फाइल रजिस्ट्रार के टेबल पर पहुंची तो उन्होंने एक कॉलेज के प्रबंध समिति में कुछ ऐसे नाम देखे, जिनमें आपस में खून का रिश्ता है। खून के रिश्ते के लोगों को प्रबंध समिति का सदस्य न बनाने के नियम के बावजूद ऐसा किया जाना रजिस्ट्रार को खटका तो उन्होंने सभी आवेदक फाइलों को खंगालना शुरू किया।
रजिस्ट्रार की छानबीन में प्रथम दृष्टया 25 ऐसे कॉलेज मिले, जिन्होंने रिश्ते के लोगों को तो समिति का सदस्य बनाया ही है, साथ ही ऐसा न किए जाने का शपथ-पत्र भी दिया है। रजिस्ट्रार ने 30 ऐसे कॉलेजों को भी पकड़ा है, जिनपर ऐसा किए जाने का संदेह है लेकिन उपनाम और पिता व पति का नाम बदल जाने से स्थिति साफ नहीं है। ऐसे सभी कॉलेजों से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्थिति साफ करने को कहा है।
एक्ट के मुताबिक खून के रिश्तेदारों को कमेटी का सदस्य नहीं बनाया जा सकता। पहली नजर में 25 कॉलेज इस मामले के दोषी पाए गए हैं। 30 की पड़ताल की जा रही है। ऐसा न किए जाने का शपथ-पत्र देकर कॉलेज प्रबंधन ने दोहरा अपराध किया है। पहले इनकी संबद्धता समाप्त की जाएगी। इसके बाद एफआईआर के लिए तहरीर दी जाएगी।
- प्रभाष द्विवेदी, रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी