भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के साथ ही सरकारी दफ्तरों से लेकर योजनाओं तक काम में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2005 में जनसूचना अधिकार कानून (आरटीआई) लागू किया था, मगर गोरखपुर में इस कानून को अफसर अपने ठेंगे पर रखते हैं। समय से सूचना तो देते नहीं और जब राज्य निर्वाचन आयोग सजा के तौर पर उनपर जुर्माना लगाता है तो उसे भी जमा नहीं करते।
2010 से लेकर अभी तक किसी भी अफसर ने जुर्माने के 25 हजार रुपये नहीं जमा किए। राज्य सूचना आयुक्त ने सख्ती दिखाई तो अब ऐसे 133 अफसरों को जुर्माने की रकम जमा करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से नोटिस भेजा गया है। सभी को आयोग की सख्ती का हवाला देते हुए सात दिन की मोहलत दी गई है। संबंधित विभागों के मुखिया को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समय में संबंधित अफसरों से जुर्माने की रकम विभाग के बैंक खाते में जमा कराके उसकी पूरी आख्या डीएम कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
इनमें चिकित्सा, शिक्षा, नगर निगम, जल निगम, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, जीडीए, ग्राम्य विकास अभिकरण, पंचायतीराज विभाग, समाज कल्याण, राज्य परिवहन निगम समेत तकरीबन सभी विभागों के अफसर शामिल हैं। यही नहीं, प्रशासनिक सूत्रों का तो यह तक दावा है कि जब से यह कानून वजूद में आया तभी से यानी 11 साल से किसी भी दोषी अफसर ने जुर्माना नहीं जमा किया।
गंभीर बात तो यह है कि प्रशासन के पास भी इस संबंध में कोई दस्तावेज नहीं है। जिनके कंधों पर इसकी मानीटरिंग की जिम्मेदारी है, उन्हीं को इस बारे में कोई खबर नहीं है। इन 133 दोषी अफसरों के बारे में भी प्रशासन को खबर नहीं लग पाती अगर गत दिनों राज्य सूचना आयुक्त ने बैठक कर इनकी सूची न सौंपी होती। इसके बाद प्रमुख सचिव प्रशासनिक सुधार एवं लोक सेवा प्रबंधन ने भी गोरखपुर मंडल की समीक्षा कर जल्द से जल्द दोषी अफसरों से जुर्माने की रकम वसूलने को लेकर सख्ती की थी।
जानकारी मांगने की प्रक्रिया
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के लिए संबंधित विभाग को 10 रुपये फीस देकर आवेदन करना होता है। इस पर संबंधित लोक सूचना अधिकारी को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर मांगी गई जानकारी देनी होती है। संबंधित अधिकारी द्वारा ऐसा न करने पर अपीलीय अधिकारी के पास अपील की जा सकती है। उन्हें 45 दिन के भीतर आवेदक को जानकारी मुहैया करानी होगी। अगर अपीलीय अधिकारी के स्तर से भी जानकारी नहीं मिलती है तो आवेदक राज्य सूचना आयोग में मामले की शिकायत अथवा द्वितीय अपील कर सकता है।
आसान नहीं होगी वसूली
दोषी अफसरों से अब जुर्माना वसूलना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि जिनके ऊपर भी जुर्माना लगा है, उनमें से ज्यादातर अफसरों का या तो तबादला हो गया या फिर वे रिटायर्ड हो गए। चूंकि जुर्माना उसी पर लगता है जो आवेदक द्वारा जानकारी मांगने के समय संबंधित पद पर तैनात होता है, ऐसे में मौजूदा समय में उन पदों पर तैनात दूसरे अफसरों से इसका कोई वास्ता नहीं होगा।
जुर्माना भरने से ही नहीं बच सकते
ऐसा नहीं है कि संबंधित अफसर जुर्माना भरकर जानकारी देने से बच सकते हैं। कें द्रीय सूचना आयोग ने जानकारी उपलब्ध न कराने पर एफआईआर कराने के भी निर्देश दिए हैं मगर जिम्मेदार गोरखपुर में ही नहीं पूरे सूबे में ऐसी कोई नजीर नहीं पेश कर सके।
जिम्मेदार के बोल
मुझे यह जानकारी नहीं है कि जुर्माना जमा नहीं हो रहा है। पहले कभी पता भी नहीं किया, मगर अब करूंगा। अगर किसी अफसर पर जुर्माना लगा है तो उन्हें उसे जमा करना ही होगा।
- लवकुश त्रिपाठी जन सूचना अधिकारी राजस्व/एडीएम (प्रशासन)