रेलवे पुलिस चौकी के सामने से चल रहे डग्गामार वाहन।
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आय बढ़ाने की कोशिश में जुटी रोडवेज को नुकसान ही उठाना पड़ रहा है। इसका कारण रेलवे स्टेशन से लखनऊ के बीच रोजाना बगैर परमिट के 40 से अधिक बसों का चलना है। इन्हें परिवहन विभाग और पुलिस की सरपरस्ती मिली हुई है। इससे औसतन हर माह परिवहन निगम को डेढ़ करोड़ का घाटा हो रहा है।
विभाग के लाख दावों के बावजूद डग्गामार वाहनों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। कुछ दबंग किस्म के बस संचालक अभी भी रोडवेज और रेलवे स्टेशन से खुलेआम सवारियां भर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक रेलवे स्टेशन पुलिस चौकी के ठीक सामने से निजी बसें लखनऊ के लिए खुलेआम सवारियां भर रहीं हैं। यह सब पुलिस और परिवहन विभाग की सरपरस्ती में चल रहा है।
गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली रूट पर ज्यादातर यात्री वॉल्वो और स्कैनिया बसों को पकड़ने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बस स्टेशन से चलने वाली प्राइवेट ट्रेवलर रोडवेज की वॉल्वो और स्कैनिया को चूना लगा रहीं हैं। ये बसें भी वॉल्वो की तरह एसी मिनी बस हैं। इसी का नतीजा है कि यहां से चलने वाली रोडवेज की ज्यादातर एसी बसें खाली ही जा रहीं हैं।
अनुमान के मुताबिक इन ट्रैवलरों से विभाग को हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन और ग्रामीण अंचलों से ट्रैवलर की संख्या बढ़ गई है। बीच में अभियान में सहजनवां में एक ट्रैवलर को एआरटीओ प्रवर्तन ने बंद भी किया था। लेकिन लगातार कार्रवाई न होने से संचालकों में कोई डर नहीं रह गया है।
- महेश चंद्र, एआरएम गोरखपुर डिपो
रोडवेज अधिकारियों के साथ बीच में अभियान चलाया गया था। इसमें तीन से चार ट्रैवलर बसें बंद की गईं थीं। सोमवार से फिर अभियान चलाया जाएगा।
- राकेश सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन