शासन ने नगर निगमों में आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली नियुक्ति में भी आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक के बाद स्थानीय निकाय के निदेशक ने सभी नगर आयुक्तों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। पूर्व में की गई नियुक्ति में आरक्षण नियमों का पालन करने संबंधी कोई स्पष्ट सूचना न होने पर यह आदेश जारी किया गया है।
दरअसल नगर निगम में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति में रोक के बाद एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडरों के जरिए उपलब्ध कराए गए कर्मचारियों से काम लिया जाने लगा है। शासनादेश के अनुसार ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति में भी आरक्षण के नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस शिकायत के बाद शासन ने सभी नगर निगम के आयुक्तों और नगर पालिका एवं नगर पंचायत के अधिशासी अभियंताओं को एजेंसियों या ठेकेदारों द्वारा रखे जा रहे कर्मचारियों की नियुक्ति में आरक्षण नियमों का पालन करने का आदेश जारी किया है।
इसमें कहा गया है कि पूर्व में उपलब्ध कराई गई संख्यात्मक सूचना से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि कितने व्यक्ति आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत नियुक्त हुए हैं। स्थानीय निकाय के निदेशक राकेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया है कि ऐसे सभी कर्मचारियों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर शासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बताया कि प्राप्त सूचना राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी।
इन कार्मिकों की सूचना उपलब्ध करानी है
कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, बिजली मिस्त्री, पंप चालक, बेलदार, पलंबर, लाइनमैन, लोडरमैन, लोडर खलासी, परिचारक, अध्यापक, सीढ़ीमैन, वायरमैन, कुली।
प्राफॉर्मा में दी जानी है यह जानकारी
निकाय का नाम, निकाय का प्रकार, निकाय का जनपद, आउटसोर्सिंग के जरिए भरे गए पदों की संख्या, कार्मिकों के पद के नाम, आउटसोर्सिंग से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की संख्या और उनके नाम (सामान्य, ओबीसी, एससी, अन्य), सेवा प्रदाता फर्म या मालिक का नाम।