बस सरकारी, काम प्राइवेट कूरियर का
अविनाश श्रीवास्तव
गोरखपुर। सामान कोई भी हो, बिना जांच व कागज के रोडवेज बसों में इसे गलत तरीके से लादकर इधर से उधर पहुंचाया जा रहा है। बसें सरकारी हैं, फिर भी प्राइवेट कूरियर जैसा काम किया जा रहा है। इस ‘खेल’ में चालक और परिचालक की मिलीभगत है।
जानकारी मिलने पर ‘अमर उजाला’ संवाददाता ने शनिवार को पड़ताल की तो बड़ा गोलमाल सामने आया। पता चला कि सामान की बुकिंग के वक्त 250 रुपये की बिल्टी बनाई जाती है। जब सामान तय स्थान पर पहुंचता है तो वसूली 700 रुपये की होती है। बड़े पैमाने पर ऐसा सामान लाया जाता है, जिसकी अधिकृत बुकिंग ही नहीं होती है। इसकी जानकारी आला अफसरों को है लेकिन वे मौन साधे हैं।
रोडवेज बस स्टेशन या फिर उसके आसपास गलत तरीके से लाया गया सामान किसी भी वक्त उतारते देखा जा सकता है। शनिवार को रोडवेज बस स्टेशन के पास ऐसा ही नजारा देखने को मिला। लोहिया ग्रामीण सेवा की बस में बड़ी संख्या में सामान पैक कराके मंगाया गया। बस के अंदर से सामान निकाला गया। पीछे और बगल की डिग्गी में भी सामान भरा मिला। इसी बस से सीतापुर के व्यापारी व मिक गारमेंट्स के संचालक ने 30 किलोग्राम वजन का कपड़ा सीमेंट की एक बोरी में भरकर गोरखपुर भेजा है। इसकी कीमत परिचालक ने 400 रुपये वसूली है। व्यापारी का कहना है कि रोडवेज बस के जरिए हर महीने सामान भेजा जाता है। पहले बुकिंग के नाम पर पैसा मांगा जाता है, फिर कुछ दाम तय करके ही सामान पहुंचा दिया जाता है। हर महीने बिना बुकिंग रोडवेज बस से ही सामान भेजा जाता है। शहर के रवि सेंथेटिक के मालिक और व्यापारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि सामान रोडवेज बस से मंगवाया है, फिर भी कूरियर कंपनी के मालिक ने सामान रखवा लिया। 250 रुपये की बिल्टी बनवाई थी, लेकिन अब 700 रुपये मांगे जा रहे हैं। हर बार सामान आता है। नंबर एक का काम है। कई बार बिना बुकिंग के भी सामान मंगवा लिया जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखते हैं
गोरखपुर मंडल के कई जिले नेपाल बार्डर से जुड़े हैं। बिना बुकिंग और कागज के रोडवेज बस से कोई कुछ भी भेज सकता है। इसका संज्ञान तक अफसरों ने नहीं लिया। चालक, परिचालक की सिर्फ सामान साइज देखकर ही उसका दाम तय कर देते हैं। बोरों और कार्टून में क्या है, इसकी जांच करने तक की ये जहमत भी वह नही उठाते। दाम तय होने के बाद ये उन सामानों को वह या तो बसों के अंदर रखवाते हैं या फिर बस की डिक्की में। सामानों के साथ कोई हो या न हो सामान को जहां पहुंचना होता है वो पहुंच जाता है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के दफ्तर के सामने ही मोलभाव
रेलवे बस स्टेशन पर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक केके त्रिपाठी के दफ्तर के सामने ही बिना बुकिंग सामान रखवाए जा रहे थे। यात्री सामान रखने का पैसा पूछता तो परिचालक तपाक से बताते दिखे। किसी भी सामान की बिल्टी नहीं बनी और बस में सामान लादकर ले जाया गया।
सीन-1
सीतापुर रोडवेज डिपो की बस संख्या यूपी 34 टी 9935 शनिवार की सुबह 8 बजे विश्वविद्यालय छात्रावास के पास खड़ी हुई। चालक, परिचालक उतरे तो धड़ाधड़ सामान उतरना शुरू हुआ। बस का कोई ऐसा कोना नहीं था, जहां सामान न रखा हो। सामान की वजह से यात्रियों को भी दिक्कत हुई। बस के पिछले और बाएं हिस्से कर डिक्की में भी सामान रखा गया था।
सीन-2 (बस संख्या यूपी 53 सीटी 9131)
यात्री: भइया ये सामान देवरिया ले जाना है।
परिचालक : इन सामानों के तीन सौ रुपये लगेंगे।
यात्री : अरे, भइया कुछ कम कीजिए दाम।
परिचालक : अच्छा चलो दो सौ दे दो।
यात्री: ठीक है भइया इसे रखवा दीजिए
सीन-3 (बस संख्या यूपी 52 एफ 8062 के चालक-परिचालक के बीच बातचीत)
यात्री : भइया इस सामान को रखवा दीजिए।
परिचालक : ये सामान नही जा पाएगा, इसका अलग से पैसा लगेगा।
यात्री : कितना लगेगा
परिचालक : 40 रुपये
यात्री: कुछ कम कर दो भइया।
परिचालक : इससे कम नही होगा
यात्री : अच्छा ठीक है भइया रखवा दीजिए।
होती है सामानों की तस्करी
तस्करों के लिए सामानों को ले जाने आने में सबसे अधिक सहायता रोडवेज बसों से मिलती है, क्योंकि इसकी कोई जांच नही होती है। त्योहारों में यह धंधा और भी फलता फूलता है। होली-दिवाली में बड़ी मात्रा में नकली खोआ की खेप बसों के माध्यम से कानपुर से गोरखपुर पहुंचती है, लेकिन मालिक नहीं मिलता है। ज्यादातर खोआ रोडवेज बसों से आता है।
रोडवेज का कूरियर कंपनी से है अनुबंध
रोडवेज का श्री सांई श्रद्धा कार्गो प्राइवेट लिमिटेड नामक कूरियर कंपनी के साथ अनुबंध है। इससे बुकिंग करा यात्री पांच कुंतल तक सामान बसों से ले जा सकते हैं। ये कूरियर सेवा यात्रियों को थोड़ी महंगी पड़ती है, ऐसे में यात्री चालक और परिचालक से सेटिंग कर सामानों को अपनी जगहों पर पहुंचा देतेे है। चालक, परिचालक कुछ पैसा कम लेते हैं। कूरियर कंपनी के पार्सल इंचार्ज अभिषेक राय ने बताया कि कई बार बुक सामानोें के बीच अतिरिक्त सामान छुपाकर लाया जाता है। इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की जाती है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नही होती है।
यात्री मौखिक ही सामानों को अवैध ढंग से ढोने की शिकायत करते हैं। ऐसे में उनपर कार्रवाई नही हो पाती है। साक्ष्य के साथ शिकायत मिलती तो बसों के चालक, परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती।
केके त्रिपाठी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधके