गोरखपुर। हिंदी साहित्य में आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह का गोरखपुर से गहरा नाता रहा। उनके अजीजों में शहर के प्रख्यात साहित्यकार प्रो. परमानंद श्रीवास्तव एक थे। दोनों के बीच मधुर रिश्ते की नींव गोरखपुर में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की इकाई की स्थापना के दौरान पड़ी थी। नामवर सिंह ने ही 1954 में इस इकाई की स्थापना की थी।
वर्ष 2017 में शहर के इतिहास पर वेदप्रकाश पांडेय की दस्तावेजी पुस्तक ‘शहरनामा-ए-गोरखपुर’ में इसका जिक्र किया गया है। अमरनाथ उपाध्याय ने अपने लेख में इसका कई पुराने साहित्यकारों से मिली जानकारी के आधार पर किया है। लिखा है कि सेंट एंड्रयूज कॉलेज के छात्र परमानंद श्रीवास्तव यहीं के अंग्रेजी के विभागाध्यक्ष मजनू गोरखपुरी से प्रभावित थे।फिराक गोरखपुरी जब शहर आते थे तब वह मजनू के घर ठहरते थे। यहीं पर परमानंद श्रीवास्तव फिराक, मजनू और जामिन अली की संगत में साम्यवादी विचारों के करीब हुए।मार्क्सवादी विचारों से प्रभावित कॉलेज के स्टूडेंट फेडरेशन के अध्यक्ष योगेंद्र पांडेय का साथ मिला तो परमानंद श्रीवास्तव ने गोरखपुर में प्रलेस की स्थापना के प्रयास शुरू किए। इन्होंने 1954 में वाराणसी जाकर इसका नामवर सिंह से आग्रह किया। तब नामवर ने गोरखपुर में प्रलेस की इकाई की स्थापना की।