प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बने मकानों में शौचालय का निर्माण न होने पर इसे अधूरा माना जाएगा। यही नहीं पात्रों को मिलने वाला अंतिम भुगातन भी रोक दिया जाएगा।
अप्रैल माह में केंद्र सरकार ने इंदिरा गांधी आवास योजना का नाम बदल करके प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना कर दिया था। साथ ही इसके लिए मिलने वाले बजट को भी 70 हजार से बढ़ा कर एक लाख 20 हजार रुपये कर दिया गया था। गोरखपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस योजना के तहत 21 हजार 885 लोगों को आवास देने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष मार्च 2016 तक 1126 आवास पूर्ण हो चुके हैं। इस दौरान आवासों की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि कई लोग योजना से बने मकानों में शौचालय का निर्माण कराने में आनाकानी कर रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में शौचालय का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है।
संयुक्त विकास आयुक्त गोविंदलाल श्रीवास्तव ने बताया कि यह योजना केवल बीपीएल परिवारों के लिए है। संशोधित योजना में अब कमरों के अलावा बरामदा भी दिया जा रहा है। लाभार्थी जब तक शौचालय का निर्माण नहीं करते हैं, तब तक उनका आवास पूर्ण नहीं माना जाएगा। उन्हें अंतिम भुगतान में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए शौचालय बनने के बाद ही योजना को पूर्ण माना जाएगा।