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सहजनवां विधायक : चुनाव में आए थे, फिर तो चेहरा देखा नहीं

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सहजनवां विधायक : चुनाव में आए थे, फिर तो चेहरा देखा नहीं
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गोरखपुर। सहजनवां से भाजपा विधायक शीतल पांडेय को जनता की मार्किंग में जीरो मिले हैं। क्षेत्र के ज्यादातर लोगों का कहना है कि विधायक क्षेत्र में कम आते हैं। असली विधायक तो उनके बेटे दिगंबर पांडेय हैं। विधायक निधि का बजट दिगंबर की सहमति से खर्च होता है। जैतपुर के राजाराम गुप्ता कहते हैं कि विधायक जी का हर काम दूसरे लोग देखते हैं। ऐसा लगता है कि उनकी चलती ही नहीं। विकास कुछ है ही नहीं तो नंबर किस पर दिया जाए? अडीलापार के रामाज्ञा, रामचंद्र सिंह के मुताबिक बनौडा वेलवाडाडी गाड़र मार्ग लंबे समय से खराब है। कई बार विधायक शीतल पांडेय से शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 500 मीटर सड़क पर चलना मुश्किल है। लंबे समय बाद चोरमा नाले पर पुलिया बनी, लेकिन गोरखपुर से संतकबीरनगर को जोड़ने वाली मार्टविरा, बनगांव और कोहरभार की सड़क अभी तक नहीं बन सकी। तीन किलोमीटर सड़क बन जाती तो दोनों जिलों में आवागमन की सारी समस्याएं खत्म हो जाती।
जनता की बात
एक सड़क की मरम्मत, फिर निर्माण
प्राथमिक विद्यालय नेवास से रबित सिंह के मकान तक की सड़क 2017 में मरम्मत कराई गई थी। इसपर 4.47 लाख रुपये ग्राम पंचायत निधि से खर्च किए गए। यही सड़क 2019 में नए सिरे से 10.47 लाख रुपये से बनवाई गई है। इसका क्या मतलब है ? मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। जांच चल रही है। इस बीच लोकार्पण का बोर्ड भी लगा दिया गया। मामले की शिकायत विधायक से की गई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं । इनको क्या नंबर दें ?
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:::: मुरारी लाल मौर्य, नेवास
विधायक कोटे का विकास नहीं नंबर किस बात के
विधायक कोटे का विकास तो नहीं दिख रहा है। सड़क के किनारे का ऐतिहासिक पोखरा कूड़ेदान में बदल चुका है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान शर्मसार हो रहा है। जैतपुर के दक्षिण पिच सड़क बनी, लेकिन बारिश में बह गई । लेपन काम अभी तक नहीं हो सका है। उनका सारा काम दूसरे लोग देखते हैं। चुनाव के बाद से विधायक को क्षेत्र में नहीं देखा है। कम नंबर देंगे तो विरोधी समझे जाएंगे। अब समझे तो समझें, हमारे पास उनके लिए एक भी नंबर नहीं है।
::: राजाराम गुप्ता, जैतपुर
विद्यालय जाने का पक्का रास्ता तक नहीं
राजकीय हाईस्कूल कोल्हुई तक जाने का पक्का रास्ता नहीं है। पगडंडी से होकर विद्यार्थी विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश में विद्यालय जाना मुश्किल हो जाता है। लोगों ने कई बार विधायक से मिलकर समस्या बताने की कोशिश की, लेकिन..सब बेकार। लोकसभा चुनाव के टाइम भाजपा प्रत्याशी रवि किशन जरूर आए थे। सड़क बनवाने की मांग रखी गई थी। अभी तक कोई प्रगति नहीं है। क्षेत्र के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। नंबर किस विकास को देखकर दिया जाए ।
::: कतवारू निषाद, कोल्हुई
शौचालय का निर्माण अधूरा, ओडीएफ घोषित
विधानसभा क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया, पाली विकास खंड के यादव टोला में अब भी तमाम शौचालय अधूरे पड़े हैं। अधूरे शौचालयों में लकड़ी सहित अन्य सामान भरे गए हैं। इटवा यादव टोला में भी शौचालय अधूरे हैं। चुनाव के बाद से विधायक जी को क्षेत्र में नहीं देखा है। उन्हें एक भी नंबर देना उचित नहीं है।
:::: मनोज यादव, यादव टोला (पाली विकास खंड)
शवदाह गृह बनाने में जमकर हुआ ‘खेल’
बारिश, बाढ़ का पानी उतर गया, फिर भी आमी नदी के किनारे ग्राम म्हारा बारी का शवदाह गृह पानी में डूबा है। वहां अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा। ज्यादातर शवदाह गृह बनाने में रकम का दुरुपयोग हुआ है। स्थान चयन में सतर्कता नहीं बरती गई। मामले की शिकायत विधायक से भी की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हर ग्राम पंचायत को ढाई से पांच लाख रुपये मिले थे। आप बार-बार कुछ नंबर देने को कह रहे हैं, इसलिए 10 में से जीरो नंबर देंगे। नहीं तो जीरो लायक नहीं हैं।
::: बीडी शुक्ला, पोडरा
मुख्यमंत्री का विकास छोड़ दें तो विधायक का काम कुछ नहीं
मुख्यमंत्री के विकास कार्य को हटा दिया जाए तो विधायक निधि से कुछ काम नहीं हुआ । विधायक कभी-कभी आते जरूर हैं, लेकिन विकास नहीं आया। टेकवार कुणाभारत मुख्य मार्ग बड़ा खराब है। 1995 में बनी सड़क की पटरी खत्म हो चुकी है। कई बार सड़क दुर्घटना होती है। इस मामले की शिकायत कई बार की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह समस्या देख और उसका समाधान कराए। विधायक को 10 में से 2 नंबर दे सकता हूं।
::: सुभाष तिवारी, रतसही
लकड़ी के खंभे से बिजली सप्लाई
बिजली की मुख्य सप्लाई जर्जर लकड़ी के खंभों से हो रही है। गांव में ही लकड़ी के 22 खंभे हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई जगह तार नीचे तक लटक रहे हैं। विधायक जी से समस्या बताई गई थी, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ। शायद, बजट नहीं आया है। सड़कों पर काम अच्छा हुआ है। बिजली व्यवस्था में सुधार होता तो बढ़िया मार्क्स दिए जा सकते थे। अभी 10 में से 5 नंबर दिए जा सकते हैं।
:::: रविंद्र कुमार त्रिपाठी, अलगटपुर
चुनाव के बाद से नहीं दिखे विधायक
ढाई साल बीत गए लेकिन विधायक जी नहीं दिखे। भीटी रावत से चौरसिया चौराहे तक की सड़क बेहद खराब है। 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक घंटे लग जाते हैं। कई बार दोपहिया व दोपहिया वाहन खराब हो जाते हैं। क्षेत्र की तमाम सड़कें खराब हैं। 10 में से 2 नंबर दे सकता हूं।
:::: ज्ञानेंद्र शुक्ला, हरपुर
संपर्क मार्ग तक नहीं, कैसे दूं ज्यादा नंबर
संतकबीनगर की सीमा से सटा गांव है। संपर्क मार्ग तक नहीं है। चुनाव के दौरान विधायक जी आए थे, फिर चेहरा नहीं देख सका। गांव में मूलभूत समस्याओं का भी अभाव है। विधायक जी को 10 में से 2 नंबर दे सकता हूं। चुनाव जीतने वाले जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें जनता के हर सुख, दुख का भागीदार होना चाहिए।
दिलीप कुमार मौर्य, कविसा
विधायक की बात
सवाल: आप पर विकास कार्यों में रुचि न लेने का आरोप है, क्या कहेंगे?
जवाब: आरोप निराधार है। विधायक निधि से ही 34 सड़कों का निर्माण कराया है। आमी नदी के ढढौना और गाड़र पुल बन रहा है। सहजनवां के हरदी गांव में पॉलिटेक्निक, हरपुर में आश्रम पद्धति का विद्यालय और पिपरौली में आईटीआई की स्थापना कराई जा रही है। राजकीय विद्यालय भी बन रहे हैं।
सवाल- सड़कें खराब हैं। शवदाह गृहों के निर्माण में मनमानी के आरोप भी हैं?
जवाब- सपा, बसपा की सरकार में सड़कें गड्ढायुक्त थीं। अब ऐसा नही है। क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें दुरुस्त हैं। गाड़ी से निकल जाइए, झटका नहीं लगता है। मुख्यमंत्री की विशेष कृपा रहती है। क्षेत्र में सड़क व पुलों का जाल बिछ रहा है। शवदाह गृहों के निर्माण से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कहीं गड़बड़ी है तो कार्रवाई कराई जाएगी।
सवाल- जनता कहती है आप क्षेत्र में नहीं आते हैं?
जवाब- ऐसा नहीं है। अब सब लोग तो अच्छा नहीं कहेंगे न। चुनाव के बाद से सहजनवां में कार्यालय खुला है। जो लोग आते हैं, उनकी समस्या सुनी जाती है। पत्र लिखकर समस्या के समाधान की कोशिश की जाती है। रोजाना क्षेत्र में जाते हैं। अभी चोरमा नाले में कुछ बेटियां डूब गई थीं। उनके घर भी गए थे। जनता के दुख, सुख में हमेशा शामिल होते हैं।
सवाल: विकास कार्य कराया तो जनता ने अच्छे मार्क्स क्यों नहीं दिए?
जवाब- इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं। जनता का जो भी फैसला होता है, उसे शिरोधार्य करने की परंपरा है। जनता की मार्किंग में कम नंबर क्यों मिले, इसकी समीक्षा जरूर की जाएगी।
सवाल: विपक्ष का आरोप है कि असली विधायक आपके बेटे हैं?
जवाब: यह चुनाव में टिकट न पाने और विरोधियों की साजिश है। मैं छात्र राजनीति से सक्रिय नेता बना हूं। आंख मूंदकर कोई काम नहीं करता हूं। असली विधायक मैं हूं। हां, परिवार के सदस्य कामकाज में हाथ बंटाते हैं। ऐसा हर नेता के साथ होता है। संकीर्ण मानसिकता और जातीय राजनीति से प्रेरित लोग ही ऐसा कह सकते हैं। पढ़ा-लिखा विधायक हूं। सही-गलत में फर्क आसानी से कर लेता हूं।
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विपक्ष की बात
‘असली विधायक तो दिगंबर पांडेय’
असली विधायक तो उनके बेटे दिगंबर पांडेय हैं। विधायक जी का क्षेत्र के विकास से कोई लेना देना नहीं है। वह तारामंडल क्षेत्र में आवास बनाकर रहते हैं। क्षेत्र में उनका आना-जाना बेहद कम है। बेटे दिगंबर का हस्तक्षेप तहसील, नगर पंचायत के साथ शासन, प्रशासन के कामकाज में रहता है। क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें खराब हैं। गाहासाड़ पुल अभी तक नहीं बन सका। डुमरइला से आंटापार की सड़क बेहद खराब है। क्षेत्र की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। सरकारी दफ्तर, थानों में भ्रष्टाचार की ढेरों शिकायतें आती हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।
यशपाल रावत, पूर्व प्रत्याशी सपा (सहजनवां विधानसभा क्षेत्र)
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