कांग्रेस की खिसक चुकी जनाधार की जमीन पर फिर से पकड़ बनाने के लिए पीके (प्रशांत किशोर) की नजर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग पर टिक गई है। जमीनी स्तर पर पार्टी की मजबूती के लिए पीके ने न्याय पंचायत स्तर पर पिछड़ा वर्ग को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देकर इस वर्ग को अपने साथ लाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत न्याय पंचायत स्तर से की गई है।
प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी की मांग करके अपनी दस्तक देने की कोशिश की, लेकिन सभी राजनीतिक दलों के केंद्र बिंदू में जातिगत समीकरण ही है। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपना इरादा साफ कर दिया है। इसके बाद जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाने के लिए ‘पीके’ के केंद्र बिंदू में जातिगत समीकरण ही है। इसके तहत ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन में भी पिछड़ा वर्ग को 50 प्रतिशत तक का स्थान दिया जा रहा है। हरेक न्याय पंचायत से दो-दो लोगों को लिया जाएगा, जिसमें से एक व्यक्ति पिछड़ा वर्ग से होगा।
सामान्य तौर पर सात से आठ गांव मिलाकर एक न्याय पंचायत का गठन होता है और 9-10 न्याय पंचायतों को मिलाकर एक ब्लॉक होता है। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार न्याय पंचायत से शुरुआत करके इसी समीकरण को आगे तक बढ़ाने की योजना है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. सैयद जमाल ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले लखनऊ में प्रशांत किशोर के साथ पदाधिकारियों की बैठक में न्याय पंचायतों का गठन इसी आधार पर करने का निर्देश दिया गया है। उम्मीद है कि जून के पहले पखवाड़े में इनके अलावा अन्य चयनित पदाधिकारियों के साथ राहुल गांधी की बैठक होगी।