श्रीनगर के कुशामो में बुधवार भोर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद सेना के जवान श्याम नारायण यादव का शव पैतृक गांव झंगहा के गोपलापुर आने का इंतजार शुक्रवार देर रात तक परिवार और गांव के लोग करते रहे। सुबह से ही परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिसने भी सुना, घर की ओर रुख कर दिया था। लोगों के आने जाने का क्रम देर शाम तक बना रहा। घटना से गांव का माहौल गमगीन है।
बृहस्पतिवार को जब इसकी सूचना सेना के अधिकारियों ने श्याम नारायण के बड़े भाई ग्राम प्रधान नगेंद्र यादव को दी तो परिवार ही नहीं समूचे गांव का माहौल गमगीन हो गया था। घर में कोहराम मच गया। शुक्रवार को शव आने की सूचना पर सुबह से ही घर पर लोगों के आने-जाने क्रम बना रहा, लेकिन देर रात तक शव नहीं पहुंचा। रामाज्ञा यादव के छह बेटों में श्याम नारायण तीसरे नंबर पर थे। शहीद की पत्नी सुनीता बेसुध सी हैं। पिता नागेंद्र और मां श्रीजावती का भी रो-रोकर बुरा हाल है। पिता का कहना है कि श्याम नारायण शुरू से ही होनहार था और सेना में भर्ती की तैयारी में लगा था। सन 2004 में वे गोरखपुर में सेना में भर्ती हुए थे। नागपुर में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग पठान कोट में यार्ड ग्रुप में सिपाही के पद पर हुई थी। श्रीनगर में तीसरी पोस्टिंग के दौरान आतंकवादिओं से मुठभेड़ के दौरान वे शहीद हो गए।
श्याम नारायन की शादी बड़हलगंज के दौनाडीह में वर्ष 1997 में हुई। वे अपने पीछे पत्नी सुनीता, बेटी निधि (11), खुशबू (9) और नीतू (7) सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए। पूर्व प्रमुख केशवनाथ यादव सहित कई जनप्रतिनिधि शहीद के परिवार को सांत्वना देने घर पहुंचे थेे।