मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं। अभी महिला मरीज के पैर के ऑपरेशन का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि सर्जरी विभाग का एक मामला सामने आया है। बिहार के एक मरीज को ऑपरेशन के नाम पर दो माह से एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर तक दौड़ाया जा रहा है लेकिन उसका इलाज नहीं हो पाया। हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पत्र को भी अनसुना कर दिया। शनिवार को पीड़ित का पति प्रिंसिपल से मिला तो उन्होंने दूसरे डॉक्टर से ऑपरेशन करवाने का भरोसा जताया है।
बिहार के पश्चिमी चम्पारण के बगहा के रहने वाले रंजन श्रीवास्तव की पत्नी सीमा श्रीवास्तव के सीने में घाव है। बीते 17 फरवरी को वह पति के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंची और सर्जरी विभाग के सर्जन डॉ. अभिषेक जीना से दिखाकर परामर्श लिया। डॉक्टर जीना ने रंजन को बताया कि उसकी पत्नी के सीने की नस सड़ गई है, जिससे घाव हो गया है। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने की सलाह दी और पर्ची पर दवा लिखने के बाद 21 फरवरी को दुबारा आने की बात कही।
रंजन का आरोप है कि तय डेट पर वह दोबारा ओपीडी में पहुंचा, तो यहां अल्ट्रासाउंड जांच के साथ दवा लिख दी गई। उसने बाहर से 2200 रुपये खर्च कर सभी जांच भी करवा लिया लेकिन उसके बाद भी ऑपरेशन न कर उसे फिर डेढ़ माह बाद बुलाया। डेढ़ माह बाद फिर जब उसने डॉक्टर से संपर्क किया तो इस बार डॉक्टर के साथ के एक अन्य व्यक्ति ने डॉक्टर जीना के घर का पता देते हुए वहां जाने को कहा। डॉक्टर अपने घर के बेसमेंट में बैठे हुए थे। रंजन ने आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टर ने उससे घर पर ही ऑपरेशन करवाने के लिए दबाव बनाया। जब उसने असमर्थता जताई तो डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कई और मरीज होने की बात बोलकर ऑपरेशन के लिए मना कर दिया। इसके बाद उसने दूसरे डॉक्टर यूसी सिंह से अपने मरीज के इलाज के लिए गुहार लगाई।
डॉ. सिंह ने उसे सर्जरी वार्ड के बेड नंबर 17 पर भर्ती करवा दिया। रंजन ने ऑपरेशन का पूरा सामान भी खरीद लिया था लेकिन अगले दिन सुबह ओटी में पत्नी सीमा को ले जाने पर ऑपरेशन करने से मना करते हुए फिर एक हफ्ते बाद आने को कहा गया। आरोप है कि इसी बीच एक जूनियर डॉक्टर ने उससे 15,000 रुपये जमा करने पर ही ऑपरेशन होने की बात कही, नहीं जमा करने पर लौट जाने को भी कहा।
सीएम के पत्र का भी असर नहीं
रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टरों के बार-बार लौटाने पर परेशान होकर उसने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर शिकायत की। इस मामले में मंदिर से लिखित पैरवी भी की गई। प्राचार्य ने लेटर का संज्ञान लेकर तत्काल सर्जन डॉ. यूसी सिंह को बुलवाया और बात की। इसके बाद उन्होंने सर्जन डॉ. योगेश पाल को ऑपरेशन करने को कहा, लेकिन उसके बाद भी ऑपरेशन नहीं हो सका। शनिवार को फिर रंजन ने प्राचार्य से मिलकर मामले की जानकारी दी। प्राचार्य ने एक बार फिर सर्जन डॉ. संदेश श्रीवास्तव को ऑपरेशन करने के लिए कहा।