बॉलीवुड की कई फिल्मों में दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले कलाकार मनोज जोशी की टीम ने शनिवार की शाम को शहर के एमपी इंटर कॉलेज मैदान में ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन किया। छोटे पर्दे पर सम्राट अशोक सीरियल में चाणक्य बने मनोज के अभिनय से सजे मंचन को देखने के लिए दर्शक उमड़े तो पंडाल छोटा लगने लगा। चाणक्य बनकर मनोज जोशी मंच से राष्ट्रीयता का संदेश फैला गए।
वह दिव्य प्रेम सेवा मिशन के लिए ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन करने गोरखपुर पहुंचे थे। मनोज जोशी ने महिरभूता की सधी हुई पटकथा और सटीक संवादों से दर्शकों को बार-बार तालियां बजाने पर मजबूर किया। इसका निर्देशन भी मनोज जोशी ने खुद ही किया। नाटक के जरिए विभिन्न बुराइयों पर व्यंग्य किया तो वहीं कई संवादों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। मनोज जोशी ने मंचन से जहां सत्ता लोभी राज सत्ता के खिलाफ चाणक्य के नेतृत्व में आम आदमी का विद्रोह दिखाया वहीं राज प्रासादों के अंदर के सत्ता षड्यंत्र भी बखूबी पेश किया।
चाटुकारों से घिरे चंद्रगुप्त मौर्य के बड़े भाई व मगध नरेश हिरण्य गुप्त धनानंद की खलनायक वाली भूमिका का भी दर्शकों के खूब लुत्फ उठाया। राज सत्ता में राजाओं को षड्यंत्रों में उलझाने वाले विदूषक का अभिनय कर कलाकारों ने अपना लोहा मनवाया। संवादों में जहां चाणक्य के सूक्ति वाक्यों का बखूबी प्रयोग कर दर्शकों को राजनीति, कूटनीति व धर्म नीति की सीख दी गई। युद्ध नीति के गुण दोषों पर भी नाटक ने बखूबी प्रकाश डाला। मगध नरेश की राजसभा में अपमानित चाणक्य का शिखा फैलाकर भारत को अखंड बनाकर मगध के सिंहासन पर चंद्रगुप्त मौर्य को बैठाने की प्रतिज्ञा के दृश्य में मनोज जोशी की सशक्त संवाद अदायगी पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मनोज जोशी ने नाटक के जरिए बताया कि चाणक्य ने आज से 2400 साल पहले ही कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद पर प्रहार करते हुए इसके समाधान के रास्ते भी बता दिए थे। ढाई घंटे के शो में एक शिक्षक चाणक्य के शिष्य चंद्रगुप्त का इस्तेमाल करके पूरे भारत को एकजुट करने के सफर का सजीव प्रस्तुति दी गई।
जख्म पर भारी पड़ा कलाकार का जज्बा
9:15 बजे मंचन के दौरान तेज हवा से मंच का एक हिस्सा पर्वत नरेश बने कलाकार पर गिर गया। इसके वजनी होने से कलाकार के कंधे पर हल्की चोट आई, जिससे वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। हालांकि कलाकार ने जीवटता दिखाई और थोड़ी ही देर में उसने जोर से अभिनय शुरू कर दिया। इस बार उनका हौसला और उत्साह देख दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
धर्म राष्ट्र और समाज के विकास के लिए
‘चाणक्य’ के एक दृश्य में मनोज जोशी के संवाद पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। बोले, धर्म राष्ट्र और समाज के विकास के लिए होता है। अगर धर्म राष्ट्र के विकास में बाधक बन जाए तो वो त्याज्य है। नाटक के एक दृश्य के दौरान कुरु राज कहते हैं कि जब राजा सोया हो तो उसके मंत्री और सेनापति कैसे जगे रह सकते हैं। यह संवाद शासन सत्ता के अगुवा के दायित्व समझा गया।
राष्ट्र से अधिक महत्वपूर्ण नहीं नीति
‘चाणक्य’ में तमाम संवाद संदेश देने वाले थे। ऐसा ही एक संवाद मनोज जोशी ने पेश किया तो लोगों में राष्ट्रवाद की भावना उफान पा गई। मनोज बोले, राष्ट्र से अधिक महत्व की कोई नीति नहीं होती। कंस, दुर्योधन, द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह का वध युद्ध नीति को तोड़कर छल से किया गया। फिर भी इनका जिक्र इतिहास में धर्मयुद्ध के रूप में है, क्योंकि इसमें राष्ट्रहित छिपा था।
इनके सहयोग से जीवंत हुआ कथानक
मनोज जोशी के साथ उनकी पूरी टीम की मेहनत से कथानक जीवंत हो उठा। महा अमात्य की भूमिका में अशोक भाटिया प्रभावशाली रहे तो वहीं सुनील शिंदे ने धनानंद और धर्मेंद्र ने चंद्रगुप्त का किरदार निभाकर खूब तालियां बटोरीं। संजय भट्ट, राजन जोशी, कविता राठौर और चारु जोशी ने विभिन्न किरदारों में प्राण फूंक दिए। लाइट और साउंड की व्यवस्था धर्मथ जोशी ने संभाली।
विधानसभा अध्यक्ष ने किया उद्घाटन
नाट्य मंचन को देखने के लिए विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित भी पहुंचे थे। वह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। नाटक की शुरुआत उन्होंने अन्य अतिथियों के साथ दीप जलाकर की। विशिष्ट अतिथि बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. सुरेंद्र दुबे थे। मिशन के संस्थापक अध्यक्ष आशीष गौतम, अध्यक्ष सीताराम जायसवाल, कार्यक्रम संयोजक अजय सिंह टप्पू, भाजपा संगठन मंत्री कामेश्वर सिंह मौजूद थे।