गोरखपुर। कांग्रेस और भाजपा से उम्मीदवार न आने और बसपा प्रत्याशी लाल अमीन के नामांकन बाद नाम वापस ले लेने से स्थानीय निकाय खाते के एमएलसी चुनाव में सपा की राह भले ही आसान हो गई है लेकिन सत्ता की मजबूती और एमएलसी तक के आसान सफर के बावजूद सपा में स्थायित्व का अभाव है।
गोरखपुर-महराजगंज सीट की चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के पहले दिन से लेकर नाम वापसी तक सपा उम्मीदवार के नाम में कई दफा बदलाव की बात सामने आ चुकी है। अब फिर सपा की उम्मीदवारी सीपी चंद की जगह जयप्रकाश (जेपी) यादव के खाते में बताई जा रही है। पार्टी उम्मीदवारी को लेकर सपा में चल रही सीपी बनाम जेपी की जंग से सपा कार्यकर्ता भी सकते में हैं।
साल 2010 में हुए पिछले एमएलसी चुनाव में सपा ने सीपी चंद को मैदान में उतारा था तो फैसले से नाखुश जयप्रकाश यादव आजाद उम्मीदवार के तौर पर सामने आ गए थे। जीत बसपा के गणेश शंकर पाण्डेय के हाथ लगी थी। इस दफा फिर चुनाव की सुगबुगाहट के साथ सपा के खाते फिर जेपी या सीपी का सवाल उठने लगा। दोनों की मजबूत दावेदारी से संगठन के भीतर भी रह-रह कर कयास लगते रहे।
कयासों पर विराम लगा जयप्रकाश यादव के नाम के एलान से लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं बन सकी। दोनों नामों के बीच का अंतर्द्वन्द्व न सिर्फ स्थानीय नेताओं के बीच जारी रहा बल्कि 11 फरवरी को जेपी की जगह सीपी के टिकट की तेज चर्चा ने सपा नेताओं के एक गुट को लखनऊ तक दौड़ने पर मजबूर कर दिया। फिर से बाजी जेपी के हाथ बताई गई और 13 फरवरी को पार्टी के अधिकार पत्र के साथ जयप्रकाश यादव ने नामांकन दाखिल कर दिया। जेपी समर्थकों की यह खुशी भी स्थायी नहीं रह सकी। 15 फरवरी को नामांकन के आखिरी दिन सीपी चंद ने भी पार्टी के अधिकार पत्र के साथ पर्चा दाखिल कर दिया।
जेपी समर्थकों के लिए यह बदलाव राजनीतिक आघात जैसा था तो हृदयघात की जद में आने पर जेपी को लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराने की नौबत आ गई। पर्चों की जांच में प्रशासन ने जेपी को निर्दल उम्मीदवार की श्रेणी में रखकर सपा नेतृत्व का रुख सीपी के हक में होने की राय पर मुहर लगा दी लेकिन गुरुवार को नाम वापसी के अंतिम दिन एकाएक फिर संगठन ने सीपी की जगह जेपी को सपा सपा उम्मीदवार बता दिया।
हालांकि सीपी समर्थक इस बात से इत्तफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि प्रदेश सपा के मुखिया एवं मुख्यमंत्री बाहर थे। ऐसे में गुरुवार को उनके स्तर से किसी बदलाव को हरी झंडी नहीं दी जा सकती। जिलाध्यक्ष का कहना है कि नाम वापसी की समयसीमा पूरी होने से कुछ पहले उन्हें लखनऊ से संदेश मिला कि अब जेपी ही सपा के उम्मीदवार रहेंगे। प्रशासनिक रिकॉर्ड में उनकी स्थिति निर्दल होने के कारण उन्हें सपा समर्थित माना जाएगा। इस बीच सीपी भी चुनाव मैदान में बने हुए हैं।