बड़े नोटों पर पाबंदी का असर जिला अस्पताल में भी देखने को मिल रहा है। यहां ओपीडी में मरीजों की संख्या घटी है तो भर्ती मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। अस्पताल में जांच आदि मद से आने वाली रकम में भी कमी आई है।
जिला अस्पताल में औसतन 1800 से दो हजार मरीज रोजाना पहुंचते हैं। मगर नोटों पर पाबंदी के बाद से यह संख्या एक हजार से 11 सौ तक सिमट गई है। वहीं इमरजेंसी में रोजाना भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या औसतन 25 से 30 की है, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में बड़े नोटों की बंदी से यह संख्या दोगुनी हो गई है। इस वक्त अस्पताल में 50 से 60 मरीज भर्ती हो रहे हैं। एसआईसी डॉ. एचआर यादव का कहना है कि मरीजों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं की गई हैं।
ओपीडी में आए मरीजों का आंकड़ा
8 नवंबर - 1788
9 नवंबर- 1527
10 नवंबर- 1011
11 नवंबर- 1111
12 नवंबर - 53 (रविवार था)
13 नवंबर 1316
जांच की रकम बनी मुसीबत
मेडिकल कॉलेज हो या जिला अस्पताल, यहां बड़े नोट लिए तो जरूर जा रहे हैं, मगर फुटकर न होने से मुसीबत बढ़ गई है। कई जांच ऐसे हैं, जो कम कीमत में होती हैं। ऐसे में फुटकर रकम न होने से छोटे नोटों की ही डिमांड की जा रही है।
प्राइवेट अस्पतालों में नहीं ले रहे बड़े नोट
प्राइवेट अस्पतालों में बड़े नोट पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। यहां डॉक्टर छोटे नोट की ही डिमांड कर रहे हैं, जिस वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। जेब में रुपये होने के बाद भी वह उपचार के लिए भटक रहे हैं और फुटकर की जुगाड़ में लगे हुए हैं।