आरओ रिटर्निग अफसरों को प्रशिक्षण देते दिनेश चन्द सिंह।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर वोटर बनाने के लिए चले अभियान के दौरान जिन बूथों पर आवेदन कम आए, उन बूथों पर पखवारे भर तक प्रशासन ज्यादा सक्रियता बरतेगा। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही संबंधित बूथों पर विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे।
दरअसल 15 सितंबर से शुरू हुए मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता बनने के लिए 31 अक्टूबर तक का ही मौका था। अब निर्वाचन आयोग ने इसे 15 नवंबर तक बढ़ा दिया है। इसके बाद दावे-आपत्तियों का निस्तारण और फीडिंग का काम शुरू होगा। 1 जनवरी 2017 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। वोटर बनने के लिए बढ़ाई गई अवधि के दौरान निर्वाचन आयोग की मंशा ज्यादा से ज्यादा लोगों को वोटर बनाने की है। इसे लेकर जिला प्रशासन को प्लान तैयार करने को कहा गया था।
गुरुवार को प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी. वेंकटेश ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा करते हुए कई दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी संध्या तिवारी और उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. चंद्रभूषण त्रिपाठी समेत कई अफसर मौजूद थे। बता दें कि डेढ़ महीने के दौरान जिले की सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों से वोटर बनने के लिए करीब 40 हजार आवेदन आए तो वोटर लिस्ट से 15,823 वोटरों के नाम भी काटे गए। ये वे वोटर हैं जो दूसरे शहरों में शिफ्ट हो गए, जिनका देहांत हो गया या फिर उनके नाम दो से अधिक विधानसभा की मतदाता सूची में दर्ज थे।
चुनाव में सुरक्षा तैयारियों की दी गई जानकारी
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में चल रही निर्वाचन आयोग की पाठशाला के दूसरे दिन गुरुवार को आरओ को जिला निर्वाचन प्लान बनाते वक्त बरती जाने वाली सतर्कता के साथ चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा तैयारियों और संवेदनशील तथा अतिसंवेदनशील बूथों के मानक के बारे में भी जानकारी दी गई। आयोग द्वारा नामित प्रशिक्षक व एडीएम (फाइनेंस) डॉ चंद्रभूषण ने बताया कि 28 से 30 आरओ का बैच बनाकर उन्हें निर्वाचन से जुड़ी अलग-अलग तैयारियों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। ज्यादातर आरओ इससे पहले भी विधानसभा चुनाव करा चुके हैं और उन्हें तैयारियों से जुड़ी काफी जानकारियां पहले से ही हैं। ऐसे में आयोग की गाइड लाइन को समझने में उन्हें दिक्कत नहीं हो रही। बता दें कि 19 जिलों के करीब 100 आरओ को दो चरणों दो से पांच नवंबर और फिर सात से 10 नवंबर तक गोरखपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा।