एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) पर जल्द ही ब्लड स्टोरेज यूनिट की व्यवस्था की जाएगी। इसमें वे एफआरयू शामिल नहीं होंगे जो ब्लड बैंक के नजदीक होंगे। हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दौरान अचानक खून की जरूरत पड़ने पर हाई सेंटर रेफर किया जाता है और जान पर बन आती हैं। बीते साल हुई मौतों की जांच में यह सामने आया है कि अधिकतर मौत में समय से खून मिल जाता तो जान बचाई जा सकती थी। इसे देखते हुए यह फैसला किया गया है।
प्रदेश में 1500 ब्लड स्टोरेज यूनिट खोले जाएंगे। यह बातें शहर में आए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक अमित कुमार घोष ने कहीं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि टीका को और बढ़ावा दिया जाना है। साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों की हालत सुधारनी है। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। शासन की ओर से धन की कोई कमी नहीं है। जल्द ही इस काम को पूरा कर लिया जाएगा और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। कायाकल्प योजना के तहत प्रदेश के 144 जिला अस्पताल चयनित हुए हैं। इसमें बेहतर अंक वाले अस्पताल के अगुवा को दिल्ली में समारोह कर सम्मानित किया जाएगा और जहां भी कोई कमी है उसके सुधार के लिए प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिस भी एफआरयू पर ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है वहां इसकी व्यवस्था की जाएगी। अपने जिले में महिला अस्पताल, सहजनवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पिपराइच स्वास्थ्य केंद्र तीन एफआरयू हैं और तीनों पर ही ब्लड बैंक नहीं है। मगर महिला अस्पताल में नजदीक ब्लड बैंक है इसलिए यह इसमें शामिल नहीं होगा।