उसने पति से शीघ्र शौचालय बनवाने की बात कही। शौचालय निर्माण में पैसों की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। आठवीं कक्षा तक पढ़े प्रद्युम्न दिहाड़ी के बदले यहां-वहां कार्य करते हैं। प्रद्युम्न की मां विमला ने बताया कि घर कच्चा है। मजदूरी के बूते भोजन का प्रबंध ही मुश्किल से होता है। शौचालय कहां से बनवाएं? ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों से कई बार कहने के बाद भी नतीजा शून्य रहा।
शादी के बाद से ही बहू लगातार शौचालय बनवाने का तगादा करती रही थी। बहू सुनीता बताती है कि खेतों में शौच के लिए जाना सेहत और इज्जत दोनों के लिहाज से उचित नहीं। बहू के तर्क सौ प्रतिशत जायज थे। आखिरकार प्रद्युम्न ने बहू की जिद के आगे घुटने टेक दिए और रुपये कमाने की मंशा से घर छोड़ कर बाहर चला गया ताकि शौचालय का निर्माण हो सके।
22 जुलाई को कुछ ग्रामीणों ने डीएम से नरहरिया ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में गंभीर अनियमितता की शिकायत थी। शिकायतों के क्रम में शौचालय भी हैं। जांच के लिए सोमवार को डीआरडीए के अपर अभियंता के के मिश्र पहुंचे भी थे, लेकिन हो-हल्ला की वजह से बिना जांच किए वापस लौट गए। वहीं नरहरिया ग्राम पंचायत की प्रधान मालती ने बताया कि गांव के प्रद्युम्न और उनके बड़े भाई रामू चौहान में बंटवारा हुए बमुश्किल दो महीने हुए हैं। रामू का शौचालय निर्माण कराया गया है। जबकि प्रद्युम्न का भी जल्द ही शौचालय निर्माण करवा दिया जाएगा।