नगर निगम दफ्तर के अलग-अलग विभागों में होने वाले कार्यों से जुड़ी सूचनाएं मांगने के लिए दाखिल की आरटीआई (राइट टू इंफार्मेशन एक्ट) की दो दर्जन से ज्यादा फाइलें लटकी हुई है। आवेदकों को जवाब का इंतजार है। बताया जा रहा है कि इन आवेदनों में अलग-अलग विभागों के अधूरे कार्यों और खर्च रकम आदि की जानकारी मांगी गई है।
नगर निगम दफ्तर में आरटीआई सेक्शन के कमरे के बाहर कुछ लिखा न होने से पता ही नहीं चलता कि यहां क्या काम होता है। इससे अंजान व्यक्ति जरूरत पर इसे तलाशते दिखते हैं। बमुश्किल से आरटीआई सेक्शन पर पहुंचने के बाद संबंधित लोगों से पूछा गया कि विभाग की जानकारी देता कोई बोर्ड आदि नहीं लगवाया है तो उनका तर्क था कि आंधी में प्लेट गिर गई उसे बनवाने के लिए दिया गया है। वर्ष 2005 में आरटीआई के शुरू होने पर निगम में औसतन रोजाना 25-30 आवेदन आते थे, लेकिन अब यह संख्या करीब आधा दर्जन रह गई है। अभी तक 2 दर्जन से ज्यादा आवेदनों के जवाब नहीं दिए जा सके हैं।
पार्षद प्रतिनिधि ऋषि मोहन वर्मा ने बताया कि करीब छह महीने पहले आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का अब तक कोई जवाब नहीं मिल सका है। नगर आयुक्त बद्रीनाथ सिंह का कहना है कि आरटीआई की सेवाओं को रेगुलरराइज्ड करने के लिए शनिवार और रविवार को स्पेशल अभियान भी चलाए गए है। उनकी कोशिश है कि समय सीमा के अंदर ही आरटीआई के जवाब दिए जाए। अगर किसी को सूचना नहीं मिली है तो उनके साथ संपर्क कर सकता है।