सांड़ों के हमले में शहरियों के घायल होने की घटना के बीच नगर निगम ने दो महीने में 235 सांड़ों को शहर से बाहर करने का दावा किया है। मगर उसका यह दावा उस वक्त फेल होता नजर आया, जब गुरुवार को नगर निगम गेट के सामने ही छुट्टा पशुओं और सांड़ों का जमावड़ा नजर आया। इसके चलते वहां कुछ देर के लिए जाम की स्थिति भी बन गई।
नगर निगम के दावे से अलग हकीकत में शहर की हर सड़क और गली-मोहल्लों में सांड़ घूमते नजर आ जाएंगे। हर चौक चौराहों पर दो-चार की संख्या में सांड़ बैठे रहते हैं, जो अक्सर दंगल करते नजर आते हैं। सबसे खराब स्थिति बेतियाहाता की सड़कों का है। यहां आए दिन सांड़ सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं गोलघर में इनकी वजह से आए दिन ट्रैफिक भी जाम हो जाता है। इसे लेकर बोर्ड बैठक में कई बार पार्षदों द्वारा हंगामा भी किया जा चुका है।
बावजूद इसके नगर निगम की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कहीं जाती है। लेकिन अब नगर निगम का दावा है कि अप्रैल और मई महीने में 235 सांड़ों को पशुबाड़े में पहुंचाया गया है। अब ऐसे में निगम के आंकड़े में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है।
यह है आंकड़ा
अप्रैल 2016 में 90 सांड़, 28 बछड़े पकड़े गए।
मई 2016 में 145 सांड़, 65 बछड़े पकड़े गए।
अब तक हुए हादसे
20 जनवरी- नरसिंहपुर वार्ड के निजामपुर में एक व्यक्ति की सांड़ के हमले से मौत
26 जनवरी- सांड़ के हमले से घंटाघर में बाइक सवार युवक घायल
28 जनवरी- गीता प्रेस रोड पर सांड़ के हमले में घायल व्यक्ति की मौत
01 फरवरी- नरसिंहपुर में एक डॉक्टर की छत पर गाय चढ़ी
02 फरवरी- धर्मशाला बाजार में सांड़ के हमले में व्यापारी जख्मी
10 फरवरी- शेषपुर में डॉक्टर और आर्यनगर में महिला जख्मी
21 फरवरी- सिधारीपुर में सांड़ के हमले में बुजुर्ग रफीउद्दीन अंसारी घायल
शासन के निर्देश के बाद सांड़ों को पकड़कर पशुबाड़े में रखा जा रहा है। जहां शिकायतें ज्यादा है वहां पहले धरपकड़ अभियान चल रहा है। अभियान में अगर लापरवाही बरती जा रही है तो इसकी जांच होगी।
- बीएन सिंह, नगर आयुक्त