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पथरा चुकीं आंखों से छलके खुशी के आंसू

Tue, 14 Jun 2016 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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11 साल बाद मिला आकाश (बाएं सबसे आगे) चाचा और गांव वालों के साथ। - फोटो : amar ujala
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जिंदा होने या लौटकर आने की उम्मीद छोड़ चुके मुंबई के एक परिवार को 11 साल पहले गुम हुए बेटे के गोरखपुर के कैंपियरगंज में मिलने की जब खबर लगी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चे के मुंह से चाचा शब्द निकलते पथरा चुकीं आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। कैंपियरगंज के राखूखोर में मिले भतीजे को लेकर उसके दो चाचा पैतृक गांव आजमगढ़ रवाना हो गए।
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आजमगढ़ के ससड़ा खुर्द देवपुर के मूल निवासी रामचेत गुप्ता मुंबई के गणपति पाड़ा, महात्मा फूलेनगर जूना जलालपुर थाना कलवा में परिवार समेत रहते हैं। वहां उनकी किराने की दुकान है। 24 मई 2005 में उनका करीब तीन साल का बेटा आकाश गुप्ता गुम हो गया था। इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पिता ने थाणे में दर्ज कराई थी। काफी ढूंढने के बाद परिवार के लोग निराश हो गए। उन्होंने उसके मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी थी।

रामचेत का परिवार जहां रहता है वहीं पड़ोस में राखूखोर का भी परिवार रहता है। बीते 24 मई को परिवार की एक महिला रामचेत के घर आकाश के बचपन की फोटो देख चौंक गई। कहा कि फोटो से मिलते-जुलते शक्ल का एक बच्चा हमारे गांव राखूखोर में चाय की दुकान पर काम करता है। इतना सुनना ही रामचेत के लिए काफी था।
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उन्होंने आकाश की फोटो, गुमशुदगी की रिपोर्ट और राखूखोर का पता आजमगढ़ में रहने वाले अपने दोनों भाइयों सुरेश और रामपति को भेज दिया। इसके बाद दोनों भाई रविवार को राखूखोर में मौर्या की चाय की दुकान पर पहुंचे। वहां काम कर रहे बच्चे ने उन्हें देखते ही पहचान लिया और चाचा कहते हुए उनसे लिपट गया। मौर्या की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद बच्चे को लेकर चाचा, दुकानदार और कुछ अन्य लोग कैंपियरगंज थाने पहुंचे जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आकाश को उसके चाचा को सुपुर्द कर दिया गया और वे उसे लेकर सोमवार को आजमगढ़ रवाना हो गए।

तीन साल पहले सिपाही को मिला था आकाश
तीन साल पहले लल्लन पांडेय नाम के एक सिपाही को आकाश कैंपियरगंज में घूमते हुए मिला था। उन्होंने उसे राखूखोर में चाय की दुकान करने वाले मौर्या के यहां रखवा दिया था। तभी से वह वहीं काम कर रहा था।

आकाश को पता नहीं, कैसे पहुंचा गोरखपुर
आकाश को यह पता नहीं कि वह गोरखपुर कैसे पहुंच गया। लोगों के पूछने पर वह सिर्फ इतना बताता है कि अपनी दुकान से उसने बिस्किट लिया और बाहर निकला। ट्रेन से वह गोरखपुर कैसे पहुंच गया, उसे कुछ पता नहीं।
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